नई दिल्ली। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक संजय पराते ने हाल ही में देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और उड्डयन क्षेत्र में बने संकट पर केंद्रित अपनी टिप्पणी “नागरिक परिक्रमा” श्रृंखला में सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। पराते ने कहा कि डॉलर के सामने रुपये की लगातार गिरावट और इंडिगो के परिचालन संकट ने आम जनता को गहरी कठिनाइयों में डाल दिया है।
पराते के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में वादा किया था कि “हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में सफर करेगा”, लेकिन आज स्थिति इसके उलट है। इंडिगो की 2300 उड़ानों पर निर्भर देश के सामने अचानक खड़े हुए संकट ने टिकटों की कीमतें आसमान छू दी हैं। दिल्ली से भोपाल तक के किराए 1 लाख रुपये पार कर जाने का उदाहरण उन्होंने विशेष रूप से दिया।
उन्होंने दावा किया कि निजीकरण और एकाधिकार को बढ़ावा देने वाली नीतियों का नतीजा है कि इंडिगो आज लगभग दो-तिहाई घरेलू विमानन बाजार पर कब्जा कर चुका है और DGCA के निर्देशों को भी चुनौती दे रहा है।
रेल मंत्रालय द्वारा 37 प्रीमियम ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़ने की घोषणा को उन्होंने “ऊंट के मुंह में जीरा” बताते हुए कहा कि इससे आम यात्रियों की दुर्दशा और बढ़ेगी।
पराते ने कहा कि उड्डयन क्षेत्र में संकट वास्तविक कार्यकुशलता से अधिक क्रोनी कैपिटलिज़्म (परजीवी पूंजीवाद) का उदाहरण है, जहां संकट को अवसर बनाकर टिकटों की कीमतें 8-10 गुना तक बढ़ा दी जाती हैं और सरकार बेबस दिखाई देती है।
अमेठी में दलित मजदूर की पीट-पीटकर हत्या
‘मजदूरी मांगी तो मौत मिली’, यूपी में बढ़ता जातिगत उत्पीड़न
लखनऊ।अमेठी। उत्तरप्रदेश में दलितों पर बढ़ते हमलों के बीच अमेठी जिले में एक दलित मजदूर की पीट-पीटकर हुई हत्या ने राज्य की कानून व्यवस्था और सामाजिक न्याय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संजय पराते ने अपनी टिप्पणी में इस घटना को “नए भारत का नया सामान्य” बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
ग्राम सालिमपुर में दलित मजदूर हौसिला प्रसाद अपनी 2500 रुपये की बकाया मजदूरी मांगने जमींदार शुभम सिंह के घर गया था। आरोप है कि मजदूरी न देने की नीयत से उसे लोहे की सरियों से पीटा गया और बेहोश होने पर जीप से उसके घर के सामने फेंक दिया गया। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
पराते ने कहा कि उत्तरप्रदेश में पिछले एक महीने के भीतर यह दलित लिंचिंग की दूसरी घटना है। इससे पहले लखनऊ और रायबरेली में भी दलितों को अपमानित करने और हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटा का हवाला देकर उन्होंने बताया कि:
2022 में SC/ST अत्याचारों के 51,656 मामले दर्ज हुए,
इनमें से 12,287 मामले अकेले उत्तरप्रदेश से थे,
जो देशभर के कुल मामलों का 23.78% है।
पराते ने आरोप लगाया कि दलितों और मजदूरों पर बढ़ते उत्पीड़न की जड़ें सामाजिक संरचना और उन नीतियों में हैं जिन्हें भाजपा शासन में बढ़ावा मिला है। उन्होंने मनुवादी व्यवस्था को बढ़ाने के प्रयासों को खतरनाक बताते हुए कहा कि संविधान, सामाजिक न्याय और बराबरी में विश्वास रखने वाली ताकतों — बहुजन और वामपंथियों — को एकजुट होने की आवश्यकता है।
