शहीद वीर नारायण सिंह जीवनी

SARJU SAHU

December 10, 2025

सोनाखान । बलौदा बाजार वीर नारायण सिंह जन्म: सन् 1795 (लगभग) जन्म स्थान: सोनाखान (वर्तमान में जिला बलौदाबाजार-भाटापारा, छत्तीसगढ़) पिता का नाम: रामसाय सिंह वंश: सोनाखान के जमींदार परिवार से वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं जननायक थे। वे अपने क्षेत्र के लोगों के बीच अन्नदाता, लोकनायक, और बलिदानी वीर के रूप में प्रसिद्ध हैं।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

1856–57 के अकाल में अंग्रेजों और व्यापारी वर्ग ने अनाज को छिपाकर जनता को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया था। वीर नारायण सिंह ने गरीबों में अनाज बाँटकर उनका जीवन बचाया।

अंग्रेजी शासन ने इसे “राजद्रोह” बताया और उन्हें गिरफ्तार कर रायपुर जेल में बंद किया गया। लेकिन उन्होंने जेल से भागकर पुनः संगठित होकर अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया। उनका आंदोलन धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में फैल गया।

⚔️ बलिदान

आखिरकार अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ लिया।

10 दिसंबर 1857 को रायपुर में सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई। वे छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद स्वतंत्रता सेनानी बने।

10 दिसंबर का महत्व

10 दिसंबर 1857 — इस दिन शहीद वीर नारायण सिंह ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

यह दिन छत्तीसगढ़ का शौर्य दिवस और वीर नारायण सिंह बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उनके बलिदान ने छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता की चेतना जगाई और आम जनता में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का भाव पैदा किया।

आज भी 10 दिसंबर को पूरे छत्तीसगढ़ में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है — विशेषकर सोनाखान, रायपुर, और बलौदाबाजार क्षेत्रों में।

प्रेरणा

शहीद वीर नारायण सिंह ने यह संदेश दिया “भूखे को अन्न देना कोई अपराध नहीं, अन्याय के खिलाफ खड़ा होना ही सच्ची देशभक्ति है।”

उनकी शहादत छत्तीसगढ़ की स्वाभिमान, साहस और त्याग की प्रतीक बन चुकी है।

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