बलौदाबाजार-भाटापारा। कसडोल तहसील अंतर्गत ग्रामीण सेवा सहकारी समिति कोसमसरा मर्यादित (पंक्र 1283) के धान खरीदी केंद्र में तौल को लेकर गंभीर अनियमितता सामने आई है। कागज़ों में रोज़ाना भौतिक सत्यापन और उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजे जाने के दावों के बावजूद महीनों तक तौल मशीनों में गड़बड़ी का पकड़े न जाना पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
किसानों ने आरोप लगाया कि निर्धारित वजन के बजाय प्रत्येक बोरी में 200 से 300 ग्राम अतिरिक्त तौल लिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि घर से तौलकर लाए गए धान और फड़ में की गई तौल के बीच स्पष्ट अंतर पाया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
पुनः तौल से इनकार, बढ़ा विवाद
शिकायत की पुष्टि के लिए जब पत्रकारों ने किसानों की मौजूदगी में पुनः तौल कराने का आग्रह किया, तो फड़ प्रभारी ने दुबारा तौल से साफ इनकार कर दिया। कथित अनियमितता उजागर होने की आशंका में जांच टालने का प्रयास किया गया, जिससे मौके पर विवाद की स्थिति बनी।
मामले की सूचना कसडोल के वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक को दी गई, जिन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से संपर्क करने की बात कही। इसके बाद एसडीएम कसडोल रामरतन दुबे ने तत्काल संज्ञान लेते हुए तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए।
तहसीलदार की जांच में खुली तौल मशीनों की पोल
एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार विवेक पटेल ने मौके पर जांच की। जांच के दौरान एक ही बोरी को अलग-अलग तौल मशीनों में तौला गया, जहां तीन मशीनों ने तीन अलग-अलग वजन दिखाए—
एक मशीन में बोरी 200 ग्राम अधिक
दो अन्य मशीनों में वही बोरी 200 ग्राम कम
यह अंतर तौल मशीनों से छेड़छाड़ की ओर स्पष्ट संकेत करता है। पूछताछ में संबंधित कर्मी द्वारा 200 से 300 ग्राम अतिरिक्त तौल लेने की बात स्वीकार किए जाने का भी दावा किया गया।
संदेहास्पद बोरियों से बढ़ा शक
जांच के दौरान एक चबूतरे पर 25–30 बोरियों की अलग से सिलाई कर रखी गई ढेरी मिली, जो संदेहास्पद प्रतीत हुई। तहसीलदार और पटवारी की मौजूदगी में इन बोरियों की तौल करने पर कुछ बोरियों में 42.5 किलो तो कुछ में 37.5 किलो वजन पाया गया, जो निर्धारित मानक से काफी अधिक और काफी कम है। आशंका जताई जा रही है कि किसानों से अतिरिक्त काटे गए धान को अलग भरकर रखा गया था।
निगरानी तंत्र पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोज़ाना भौतिक सत्यापन और रिपोर्टिंग के बावजूद तौल मशीनों की गड़बड़ी अंतिम चरण तक अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आई। यह लापरवाही है या फिर किसी स्तर पर संरक्षण? समिति प्रबंधक, नोडल अधिकारी (पटवारी), मर्यादित बैंक के सुपरवाइज़र और शाखा प्रबंधक की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
किसानों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा और दोषियों पर क्या कठोर कार्रवाई होगी—या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा—यह अब जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक निर्णय पर निर्भर करेगा।
अधिकारियों के बयान
वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक कसडोल ए.के. सूर्यवंशी ने कहा कि तौल में अनियमितता और भौतिक सत्यापन एसडीएम के अधिकार क्षेत्र का विषय है, शिकायत उन्हें अवगत कराई जानी चाहिए।
एसडीएम कसडोल रामरतन दुबे ने बताया कि शिकायत पर तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जांच अधिकारी तहसीलदार विवेक पटेल ने कहा कि एसडीएम के निर्देश पर आकस्मिक जांच की गई है और जांच प्रतिवेदन एसडीएम को भेजा जाएगा।
कोसमसरा धान खरीदी केंद्र का यह मामला केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। अब निगाहें प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी