छात्रों और समाजसेवियों का होगा सम्मान, शासन से जीवन-दर्शन को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग
बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ की सामाजिक चेतना की प्रमुख हस्तियों में शामिल मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर प्रदेशभर में श्रद्धांजलि सभाओं और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। सतनामी समाज और संघ की ओर से आयोजित इन कार्यक्रमों में छात्रों के सम्मान के साथ समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा।
संघ के प्रांताध्यक्ष एवं सतनामी समाज के सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम राय गुरुजी ने बताया कि मिनीमाता जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर प्रदेश के विभिन्न जिलों और क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए उनके सामाजिक सरोकारों और योगदान को याद करते हुए नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ उठाई आवाज
मिनीमाता जी का जन्म 15 मार्च 1913 को मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में हुआ था। 18 वर्ष की आयु में उनका विवाह छत्तीसगढ़ के महान संत गुरु घासीदास जी के वंशज ठाकुर प्यारेलाल जी से हुआ। विवाह के बाद वे छत्तीसगढ़ आईं और यहीं रहकर सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हुईं।
1952 में वे पहली लोकसभा के लिए सांसद चुनी गईं और 1972 तक सांसद रहीं। इस दौरान उन्होंने वंचित वर्गों, किसानों, महिलाओं और सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रमुखता से उठाया।
मिनीमाता जी ने जातिगत भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लगातार संघर्ष किया। सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक स्थलों पर समान अधिकार के लिए उन्होंने आवाज उठाई। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार, बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए भी उन्होंने काम किया।
नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
विक्रम राय गुरुजी ने कहा कि मिनीमाता जी केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनता के लिए सेवा, ममता और संघर्ष की प्रतीक थीं। उन्होंने अपना जीवन वंचितों, दलितों और महिलाओं के उत्थान के लिए समर्पित किया। उनकी सादगी और सामाजिक सरोकार आज भी समाज के लिए प्रेरणा हैं।
संघ और सतनामी समाज ने शासन से मांग की है कि मिनीमाता जी के नाम से संचालित योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाए और उनके जीवन-दर्शन एवं सामाजिक योगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। संगठन का कहना है कि इससे विद्यार्थियों को उनके संघर्ष और विचारों की जानकारी मिलेगी और सामाजिक समानता, शिक्षा तथा मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी।