
क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माता तुर्तुरिया धाम इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। महर्षि वाल्मीकि आश्रम एवं लव-कुश की जन्मभूमि के रूप में विख्यात इस स्थल पर स्थित बालमडीह नदी पूरी तरह सूख चुकी है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में जल स्तर करीब 600 फीट नीचे चला गया है। गर्मी अभी अपने चरम पर नहीं पहुंची है, लेकिन हालात पहले से ही चिंताजनक बने हुए हैं। पानी की भारी कमी के कारण लोगों को पीने, नहाने और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। कई श्रद्धालु भोजन बनाने के लिए भी लगभग एक किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं।
धार्मिक आस्था के इस केंद्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां ज्योति प्रज्वलित करने की परंपरा भी प्रचलित है, जिसमें श्रद्धालु तेल और घी अर्पित करते हैं। इसके बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों की परेशानियों को और बढ़ा रहा है।
स्थानीय निवासी लच्छी ध्रुव ने बताया कि क्षेत्र में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और पूरा इलाका सौर ऊर्जा पर निर्भर है। मौसम खराब होने पर बिजली की समस्या और गंभीर हो जाती है। नियमित बिजली लाइन और पंखों जैसी सुविधाओं का भी अभाव है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार आवेदन और शिकायतों के बावजूद प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। कलेक्टर और क्षेत्रीय विधायक संदीप साहू तक गुहार लगाने के बाद भी कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार मांग कर चुके हैं कि क्षेत्र में स्टॉप डैम (छोटा बांध) का निर्माण कराया जाए, ताकि पानी की स्थायी व्यवस्था हो सके, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
साथ ही, पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है, लेकिन सुरक्षा के लिए जाली या रेलिंग जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी अब तक नहीं की गई हैं।
स्थानीय नागरिक बुदराम नेताम, भागवत मांडवी और धनकुमार चौहान सहित अन्य लोगों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
धार्मिक आस्था के इस केंद्र पर श्रद्धालुओं का विश्वास आज भी अटूट है, लेकिन अब वे प्रशासन से ठोस और त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।