कोरिया। 21 अप्रैल 2026 जिले के सोनहत जनपद पंचायत अंतर्गत 42 ग्राम पंचायतों में सचिवों की भारी कमी एवं अव्यवस्था का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, एक ओर कई पंचायतों में एक सचिव को दो नहीं, बल्कि तीन-तीन ग्राम पंचायतों का प्रभार संभालना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर चार ऐसे सचिव भी हैं, जिनके पास एक भी ग्राम पंचायत का प्रभार नहीं है और वे केवल जनपद कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं।
सचिवों पर अत्यधिक बोझ, दूर-दराज के क्षेत्रों में समस्या जटिल
जिन सचिवों के पास कई पंचायतों का जिम्मा है, उन्हें जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर खंड मुख्यालय सहित 20 से 25 किलोमीटर के दायरे में कार्य करना पड़ रहा है। इससे उनके लिए सभी पंचायतों में नियमित उपस्थिति देना संभव नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों की शिकायत: 10-20 दिन में एक बार पहुँचते हैं सचिव
ग्रामीणों का कहना है कि कई पंचायतों में सचिव 10 से 20 दिनों में एक बार ही कार्यालय पहुँचते हैं। उस दौरान भी वे अधिकतर विभागीय कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे आम लोगों के काम लंबित रह जाते हैं और योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता।
नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर बाहर निवास कर रहे सचिव
एक और गंभीर पहलू यह भी सामने आया है कि कई सचिव जनपद मुख्यालय से बाहर निवास कर रहे हैं, जबकि शासन-प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार उन्हें कार्यस्थल या मुख्यालय के समीप रहना अनिवार्य है। इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
असमानता का खेल: एक तरफ तीन-तीन पंचायत, दूसरी तरफ शून्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ कुछ सचिवों पर अत्यधिक कार्यभार है, तो दूसरी तरफ कुछ सचिव बिना प्रभार के ही बैठे हैं। ऐसे में यह व्यवस्था किसके संरक्षण में चल रही है, यह समझ से परे है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब संज्ञान लेते हैं और पंचायत व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।