कोरबा। जिले के पाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मांगामार से सामने आया एक मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है। एक गरीब किसान द्वारा जनदर्शन में की गई शिकायत के बावजूद एक सप्ताह बीत जाने पर भी किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्राम के किसान छन्दराम ने आरोप लगाया है कि पटवारी द्वारा जमीन से जुड़े कार्यों—जैसे पर्ची एवं ऑनलाइन प्रक्रिया—के लिए 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। किसान का कहना है कि वह पहले भी कुछ राशि दे चुका है, इसके बावजूद उससे दोबारा पैसे की मांग की जा रही है।
किसान ने यह भी आरोप लगाया कि रिश्वत देने से इनकार करने पर पटवारी द्वारा उसके कार्य को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है, जिससे उसे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मामले को लेकर क्षेत्र के कई सरपंचों ने भी समर्थन देते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी द्वारा 10 से 20 हजार रुपये तक की “रेट लिस्ट” बनाकर वसूली की जा रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
सबसे अहम बात यह है कि जनदर्शन जैसे मंच पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी एक सप्ताह तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है। इससे आम नागरिकों का भरोसा व्यवस्था से उठता नजर आ रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पटवारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और शासन-प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास बना रहे।