
रिपोर्टर टेकराम कोसले
जिला मुख्यालय], दिनांक — 28/02 2026 को नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। कल रात कुल 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के विभिन्न स्तरों के सक्रिय और जिम्मेदार पदाधिकारी शामिल हैं, जिससे सुरक्षा बलों को बड़ी रणनीतिक बढ़त मिली है।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी
आत्मसमर्पण करने वालों में विकाश, दिनेश, कविता, सविता, मंगेश, रिंकू, जुगनू, अस्मिता, सस्मिता, अमिता, होलिका, रीता, नीला, मीना और बेबी शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन सभी की संगठन में सक्रिय भूमिका रही है और ये लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में संलिप्त थे।
संगठन में जिम्मेदार पदों पर थे तैनात
आत्मसमर्पण करने वाले 15 माओवादियों में —
1 स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य
2 डिवीजनल कमेटी सदस्य
5 एरिया कमेटी सदस्य
7 प्लाटून सदस्य
शामिल हैं।
यह तथ्य इस आत्मसमर्पण को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि संगठन के निर्णय लेने वाले स्तर के सदस्य भी अब हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं।
भारी मात्रा में हथियार बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में घातक हथियार बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं —
3 एके-47 राइफल
2 एसएलआर (Self Loading Rifle)
3 .303 राइफल
3 बारह बोर बंदूक
2 इंसास राइफल
1 14 मस्कट
इन हथियारों की बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी सक्रिय ऑपरेशनल गतिविधियों में शामिल थे।
आत्मसमर्पण नीति का असर
पुलिस और प्रशासन द्वारा चलाई जा रही आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का सकारात्मक प्रभाव लगातार देखने को मिल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार की पुनर्वास योजनाओं, सुरक्षा और रोजगार के अवसरों ने भटके युवाओं को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है।
सुरक्षा बलों का कहना है कि आने वाले समय में भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज किया जाएगा, ताकि स्थानीय युवाओं को हिंसा के रास्ते से दूर रखा जा सके।
क्षेत्र में शांति की ओर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि संगठन के उच्च पदों पर रहे सदस्यों का आत्मसमर्पण नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे न केवल खुफिया जानकारी मिलने की संभावना बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में भी यह बड़ा कदम साबित हो सकता है।