कोरबा: भू-विस्थापितों का ‘हक की लड़ाई’ तेज, दिल्ली तक हल्ला बोल

MOTI LAL

February 26, 2026

प्रमोद कुमार बंजारे, संभाग ब्यूरो चीफ

कोयला मंत्री को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी नहीं हुईं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

कोरबा (सुघर गांव)। “हमारी जमीन पर कोयला निकल रहा है और हमारे बच्चे दाने-दाने को मोहताज हैं।” यह आक्रोश उन हजारों भू-विस्थापित परिवारों का है, जिनकी जमीनें साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका, गेवरा और कुसमुंडा खदानों में अधिग्रहित हो चुकी हैं।

भू-विस्थापित कोयला कर्मचारी एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष संतोष पटेल के नेतृत्व में आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में कोयला मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्थानीय बेरोजगारों का सब्र अब टूट चुका है और मांगें पूरी नहीं होने पर ‘आर-पार’ की लड़ाई लड़ी जाएगी।

प्रमुख मुद्दे: वादाखिलाफी और बाहरी लोगों को प्राथमिकता

त्रिपक्षीय समझौते की अनदेखी:
10 नवंबर 2024 को दीपका परियोजना में कार्यबंदी के दौरान जिला प्रशासन, कंपनी प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। आरोप है कि रोजगार से जुड़े वादे अब तक धरातल पर लागू नहीं किए गए।

स्थानीय बनाम बाहरी विवाद:
ज्ञापन के अनुसार खदानों में स्थानीय युवाओं को दरकिनार कर बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है, जिससे 30-40 गांवों के युवाओं में आक्रोश है।

ठेका कंपनियों की मनमानी:
एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि ठेका कंपनियां मजदूरी भुगतान और रेट निर्धारण में अनियमितता बरत रही हैं, जिससे श्रमिकों का आर्थिक शोषण हो रहा है।

आर्थिक संकट गहराया

खदानों के लिए उपजाऊ जमीन देने वाले किसान आज रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संतोष पटेल के अनुसार नियमित रोजगार नहीं मिलने से विस्थापित परिवारों के बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों का इलाज प्रभावित हो रहा है। कई परिवार बुनियादी जरूरतों के लिए भी जूझ रहे हैं।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कुछ क्षेत्रों में महिलाएं भी दफ्तरों के सामने प्रदर्शन करने मैदान में उतर आई हैं।

एसोसिएशन की मुख्य मांगें

  • प्रभावित परिवारों को तत्काल स्थायी या वैकल्पिक रोजगार दिया जाए।

  • 10 नवंबर 2024 के त्रिपक्षीय समझौते की शर्तों को लागू किया जाए।

  • ठेका व कंपनी कार्यों में स्थानीय युवाओं को अनिवार्य प्राथमिकता मिले।

  • ठेका कंपनियों की वित्तीय अनियमितताओं की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो।

अंतिम चेतावनी

जिला अध्यक्ष संतोष पटेल ने दो टूक कहा है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो कोरबा में चक्काजाम, धरना-प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति के लिए एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन जिम्मेदार होंगे।

प्रधान संपादक

Share this content:

Leave a Comment