8मिनट की देरी, जर्जर सड़क और सख्त नियम के कारण परीक्षा देने से वंचित— नवोदय परीक्षा केंद्र के गेट पर फूट-फूटकर रोता रहा ग्रामीण बच्चा

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

December 13, 2025

छेरकापुर। नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा के दिन दो ग्रामीण बच्चों का सपना जर्जर सड़क और सख्त नियमों की भेंट चढ़ गया। दोनों बच्चे ससहा गांव के निवासी हैं। सहयोगी ने बताया कि उसने दोनों बच्चों को परीक्षा केंद्रों तक छोड़ा—चंदन कुमार को छेरकापुर हायर सेकंडरी स्कूल और दूसरे छात्र को रोहांसी स्कूल।

चंदन कुमार को छेरकापुर स्कूल के गेट से ही वापस लौटा दिया गया। गेट बंद होने पर वह रोता रहा। बच्चों ने रो रोकर परीक्षा अधिकारियों से कहा, “रास्ता खराब होने की वजह से देरी हो गई सर, मुझे अंदर जाने दो।” हाथ में प्रवेश पत्र और आंखों में आंसू लिए वे अपनी मजबूरी और डर को बयान कर रहे थे। चंदन ने बताया कि उसके मम्मी-पापा रायपुर कमाने गए हुए हैं, इसलिए उसे कोई साथ लाने या छोड़ने वाला नहीं था।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मामला केवल ससहा से कोदवा तक की सड़क तक सीमित नहीं है। रोहांसी से छेरकापुर मार्ग, जो बांसबिनौरी से होकर गुजरता है, अत्यंत जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढे और उखड़ी गिट्टी के कारण आवागमन बेहद कठिन हो गया है। इसी खराब सड़क के कारण बच्चे समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुँच पाए। सुबह से ही सहयोगी बच्चों को साइकिल या मोटर की व्यवस्था करने में लगा रहा, लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं हो सका और रास्ते की कठिनाई ने देरी को और बढ़ा दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में केवल चंदन कुमार को वापस भेजा गया। रोहांसी स्कूल का छात्र समय पर पहुँचने के कारण परीक्षा में शामिल हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि केवल 8 मिनट की देरी पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया होता, तो एक बच्चे का भविष्य सुरक्षित रह सकता था।

ग्रामीणों ने प्रशासन से ससहा–कोदवा और रोहांसी–छेरकापुर मार्ग की तत्काल मरम्मत कराने और भविष्य में परीक्षा जैसी परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि इस मार्ग की खराब स्थिति कई बच्चों के भविष्य के लिए खतरा बन सकती है।

यह घटना न केवल परीक्षा व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और खराब सड़क नेटवर्क की गंभीर समस्याओं पर भी सवाल खड़ा करती है। सवाल आज भी यही है—क्या नियम इतने कठोर हैं कि रोते हुए बच्चों की मजबूरी और परिस्थितियों को नजरअंदाज किया जाए?

सह संपादक

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4 thoughts on “8मिनट की देरी, जर्जर सड़क और सख्त नियम के कारण परीक्षा देने से वंचित— नवोदय परीक्षा केंद्र के गेट पर फूट-फूटकर रोता रहा ग्रामीण बच्चा”

  1. क्या एक बच्चा मात्र आठ मिनट लेट होने से परिक्षा से वंचित किया जाना अन्याय नही है क्या स्कूल प्रशासन मे इतनी भी संवेदना नहीं होनी चाहिए क्या ऐसा स्कूल प्रबंधन पे कार्य वाही नहीं होनी चाहिए,, बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड करने वाले को सस्पेंड नहीं किया जाना चाहिए इस खबर मे पत्रकार महोदय ने खबर छाप कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं पाली है माना की इस परीक्षा मे शायद हो सकता है की उस बच्चे के सलेक्शन होने के सम्भावना बिल्कुल भी नहीं हो सकती थी क्योंकि ये परीक्षा होती जरूर हर साल लेकिन,,,ये परीक्षा पर दर्शी नहीं है,, jis तरह की शिक्षा नवोदय स्कूलों मे दिया जाता है वही शिक्षा बाकी समानय स्कूलों मे क्यों नहीं दी जाती,निश्चित रूप से घोटाले की वजह हो सकती है या आम बच्चों को उच्च शिक्षा देना सरकार की मनसा नहीं है,या फिर पुरा शिक्षा प्रणाली मे सुधार की जरूरत है,, आदिकाल से हि शिक्षा मे भेद भाव होता रहा है,,महाभारत करण को गुरुकुल से भगा दिया गया था, एलब्य का अंगूठा काट लिया गया था,,वही शिक्षा आज भी निरंतर जारी है,, ab बहाने अलग अलग हैं, ये आठ मिनट का लेट,, अंगूठा काट लेने से कुछ कम नहीं है,,,तब उच्च कुलीन गुरु थे आज उच्च कुलीन शिक्षक है,,,

    ऐसा सिस्टम से समाज को कभी भी नया रास्ता नया उम्मीद करना बहुत मुश्किल है,

    संबंधित शिक्षक,शिक्षा अधिकारी को तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए और बच्चे के साथ अगर संभव हो तो परीक्षा का मौका दिया जाना चाहिए,, शिक्षा मंत्री और शिक्षा अधिकारी की संज्ञान लेकर उचित सकारात्मक कार्य वाही का इंतेजाम करना चाहिए,,

    Reply
  2. क्या एक बच्चा मात्र आठ मिनट लेट होने से परिक्षा से वंचित किया जाना अन्याय नही है क्या स्कूल प्रशासन मे इतनी भी संवेदना नहीं होनी चाहिए क्या ऐसा स्कूल प्रबंधन पे कार्य वाही नहीं होनी चाहिए,, बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड करने वाले को सस्पेंड नहीं किया जाना चाहिए इस खबर मे पत्रकार महोदय ने खबर छाप कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं पाली है माना की इस परीक्षा मे शायद हो सकता है की उस बच्चे के सलेक्शन होने के सम्भावना बिल्कुल भी नहीं हो सकती थी क्योंकि ये परीक्षा होती जरूर हर साल लेकिन,,,ये परीक्षा पर दर्शी नहीं है,, jis तरह की शिक्षा नवोदय स्कूलों मे दिया जाता है वही शिक्षा बाकी समानय स्कूलों मे क्यों नहीं दी जाती,निश्चित रूप से घोटाले की वजह हो सकती है या आम बच्चों को उच्च शिक्षा देना सरकार की मनसा नहीं है,या फिर पुरा शिक्षा प्रणाली मे सुधार की जरूरत है,, आदिकाल से हि शिक्षा मे भेद भाव होता रहा है,,महाभारत करण को गुरुकुल से भगा दिया गया था, एलब्य का अंगूठा काट लिया गया था,,वही शिक्षा आज भी निरंतर जारी है,, ab बहाने अलग अलग हैं, ये आठ मिनट का लेट,, अंगूठा काट लेने से कुछ कम नहीं है,,,तब उच्च कुलीन गुरु थे आज उच्च कुलीन शिक्षक है,,,

    ऐसा सिस्टम से समाज को कभी भी नया रास्ता नया उम्मीद करना बहुत मुश्किल है,

    संबंधित शिक्षक,शिक्षा अधिकारी को तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए और बच्चे के साथ अगर संभव हो तो परीक्षा का मौका दिया जाना चाहिए,, शिक्षा मंत्री और शिक्षा अधिकारी की संज्ञान लेकर बच्चे के हित मे आ सम्भव हो सके कार्यवाही करना चाहिए,,
    या फिर सरकार,,,
    वो स्कूल चले हम का विज्ञापन करना बंद करें

    Reply
  3. क्या एक बच्चा मात्र आठ मिनट लेट होने से परिक्षा से वंचित किया जाना अन्याय नही है क्या स्कूल प्रशासन मे इतनी भी संवेदना नहीं होनी चाहिए क्या ऐसा स्कूल प्रबंधन पे कार्य वाही नहीं होनी चाहिए,, बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड करने वाले को सस्पेंड नहीं किया जाना चाहिए इस खबर मे पत्रकार महोदय ने खबर छाप कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं पाली है माना की इस परीक्षा मे शायद हो सकता है की उस बच्चे के सलेक्शन होने के सम्भावना बिल्कुल भी नहीं हो सकती थी क्योंकि ये परीक्षा होती जरूर हर साल लेकिन,,,ये परीक्षा पर दर्शी नहीं है,, jis तरह की शिक्षा नवोदय स्कूलों मे दिया जाता है वही शिक्षा बाकी समानय स्कूलों मे क्यों नहीं दी जाती,निश्चित रूप से घोटाले की वजह हो सकती है या आम बच्चों को उच्च शिक्षा देना सरकार की मनसा नहीं है,या फिर पुरा शिक्षा प्रणाली मे सुधार की जरूरत है,, आदिकाल से हि शिक्षा मे भेद भाव होता रहा है,,महाभारत करण को गुरुकुल से भगा दिया गया था, एलब्य का अंगूठा काट लिया गया था,,वही शिक्षा आज भी निरंतर जारी है,, ab बहाने अलग अलग हैं, ये आठ मिनट का लेट,, अंगूठा काट लेने से कुछ कम नहीं है,,,तब उच्च कुलीन गुरु थे आज उच्च कुलीन शिक्षक है,,,

    ऐसा सिस्टम से समाज को कभी भी नया रास्ता नया उम्मीद करना बहुत मुश्किल है,

    संबंधित शिक्षक,शिक्षा अधिकारी को तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए और बच्चे के साथ अगर संभव हो तो परीक्षा का मौका दिया जाना चाहिए,, शिक्षा मंत्री और शिक्षा अधिकारी की संज्ञान लेकर बच्चे के हित मे जो सम्भव हो सके कार्यवाही करना चाहिए,,
    या फिर सरकार,,,
    वो स्कूल चले हम का विज्ञापन करना बंद करें,,

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  4. Laika abhi nabalik hai iska bhavishya ko Guru Ji ko sudharna chahie. Iska nivedan hamare mahoday Vishnu Dev say say,iska karan, mantri vidhayak hai, or gao ke sarpanch mera apse nivedan hai….say say

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