पिथौरा। विजयादशमी के पावन पर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा पिथौरा में मंडल स्तरीय पथ संचलन का आयोजन किया गया। पारंपरिक गणवेश में अनुशासित कतारों में कदमताल करते स्वयंसेवकों ने नगर में राष्ट्रभक्ति का माहौल बना दिया। पथ संचलन नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा, जहां नगरवासियों ने इस अनुशासित और भव्य दृश्य को उत्सुकता से देखा।
स्वयंसेवकों की एकसमान गणवेश, अनुशासित चाल और देशभक्ति से ओतप्रोत वातावरण ने लोगों को प्रभावित किया। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया गया।
राष्ट्रसेवा और अनुशासन की गौरवशाली परंपरा
पथ संचलन के पश्चात आयोजित सभा में मुख्य अतिथि के रूप में सिख समाज के पूर्व अध्यक्ष यशवंत सिंह छाबड़ा, मुख्य वक्ता के रूप में जिला कार्यवाह चंद्रशेखर नाग तथा खंड संघचालक जसबीर आजमानी मंचासीन रहे।
मुख्य अतिथि यशवंत सिंह छाबड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा राष्ट्रसेवा, अनुशासन, समर्पण और सामाजिक जागरण की यात्रा है। संघ ने व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेकर निरंतर कार्य किया है।
पंच परिवर्तन से समाज में सकारात्मक बदलाव का आह्वान
मुख्य वक्ता चंद्रशेखर नाग ने संघ की विचारधारा, उद्देश्यों और पंच परिवर्तन की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
उन्होंने बताया कि पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख विषय कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का आचरण और नागरिक कर्तव्य हैं। इनका उद्देश्य परिवारों में संस्कारों को मजबूत करना, समाज में भेदभाव मिटाकर समरसता स्थापित करना, प्रकृति का संरक्षण करना, स्वदेशी उत्पादों को अपनाना और नागरिकों को उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाना है।
व्यक्ति निर्माण से होगा राष्ट्र निर्माण
चंद्रशेखर नाग ने कहा कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं व्यक्ति से होती है। जब व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभाव को अपनाता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार पर पड़ता है। संस्कारित परिवारों से समरस समाज और सशक्त समाज से समर्थ राष्ट्र का निर्माण होता है।
उन्होंने पंच परिवर्तन को केवल विचार नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले व्यवहार और संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि इन पांच विषयों को जीवन में आत्मसात कर समाज को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
पिथौरा में आयोजित इस पथ संचलन ने विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के संदेश को प्रमुखता से सामने रखा।


