बच्चे की मौत के बाद भी 45 हजार का बिल: बिलासपुर के निजी अस्पताल पर लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप, पीड़ित पिता ने लगाई गुहार
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित श्री श्याम हॉस्पिटल पर एक नवजात की मौत के बाद पीड़ित परिवार पर भारी-भरकम बिल का दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगा है। एक तरफ जहां पिता ने अपनी संतान को खो दिया और मां को अब तक इस सदमे की भनक तक नहीं है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन द्वारा 40 से 45 हजार रुपये की मांग ने निजी चिकित्सा संस्थानों की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़ित कृष्णा कुमार केसरवानी ने अपनी सात महीने की गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा और स्वास्थ्य जटिलताओं के चलते श्री श्याम हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। परिजनों की उम्मीद थी कि अस्पताल में बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद नवजात को बचाया नहीं जा सका।
नवजात की मौत के गहरे सदमे से जूझ रहे पिता कृष्णा कुमार का आरोप है कि बच्चे के दुनिया से चले जाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन का रवैया बेहद सख्त रहा। ऑपरेशन, दवाइयों और भर्ती के नाम पर उनसे 40 से 45 हजार रुपये का अतिरिक्त बिल चुकाने को कहा गया। आर्थिक संकट से जूझ रहे पिता के पास इतने पैसे नहीं हैं, जिसके चलते उन्होंने प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से राहत की गुहार लगाई है।
इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि प्रसूता की नाजुक हालत को देखते हुए परिजनों ने उसे बच्चे की मौत की खबर तक नहीं दी है। परिवार का कहना है कि महिला अभी भी इस सदमे को झेलने की स्थिति में नहीं है, वहीं अस्पताल का यह बर्ताव उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा रहा है।
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर निजी अस्पतालों की कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि संकट की घड़ी में चिकित्सा संस्थानों को व्यावसायिक लाभ से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाओं का ख्याल रखना चाहिए। पीड़ित परिवार ने मामले में निष्पक्ष जांच और राहत दिलाने की मांग की है।