आदिवासी कांग्रेस बलौदाबाजार के पदाधिकारी छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदल कर जनजातीय कार्य विभाग करने के विरोध में कलेक्टर को ज्ञापन सौपा गया।

BIRENDRA KUMAR SEN

October 16, 2026

आदिवासी कांग्रेस बलौदाबाजार के पदाधिकारी छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदल कर जनजातीय कार्य विभाग करने के विरोध में कलेक्टर को ज्ञापन सौपा गया।

बलौदाबाजार-आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग करने के कैबिनेट के निर्णय के खिलाफ भड़के आदिवासी कांग्रेस के छत्तीसगढ़ बलौदाबाजार जिला अध्यक्ष ने इस निर्णय पर कड़ा विरोध एवं असंतोष व्यक्त किया है तथा मांग किया है कि विभाग का नाम पूर्ववत ही रखा जाये। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलकर जनजाति कार्य विभाग किए जाने के निर्णय पर विवाद गहरा गया है अबको इस मामले को लेकर आदिवासी समाज के नेताओ और जनप्रतिनिधियो मे नराजगी देखने को मिल रहा है। जिसमें जल जंगल जमीन को तो छीन ही रहे हैं आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने इस फैसले को

लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है उन्होंने आरोप लगाया है कि यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी शब्द को विलोपित करने और उनके अस्तित्व को समाप्त करने का एक गहरा षड्यंत्र है। जिला अध्यक्ष डॉ विशाल ध्रुव खुसरो ने कहा कि आदिवासी पहचान हमारी संस्कृति, इतिहास और अधिकारों का प्रतीक है इस शब्द को हटाने का प्रयास समाज के अस्तित्व पर सीधा प्रहार है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, इसके बावजूद इन नेताओं को अपने ही समाज के अधिकारों से कोई सरोकार नहीं है। बैठक में लिए गए निर्णय को पूरी तरह गलत बताते हुए

ध्रुव ने कहा आदिवासी अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे फैसले को कांग्रेस पार्टी और आदिवासी समाज कतई बर्दास्त नहीं करेगा उन्होंने सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग किया है। श्री ध्रुव ने कहा कि राज्य की 75 प्रतिशत से अधिक आदिवासी जनसंख्या आज भी विकास की मुख्यधारा से कटी हुई है सरकार को आदिवासियों के मूलभूत और नीतिगत मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय नाम बदलने की क्या आवश्यकता महसूस हुई, यह समझ से परे है समाज द्वारा वर्षों से उठाए गए कई गंभीर सवाल और समस्याएं आज भी शासन स्तर पर लंबित हैं। जबकि सरकार को चाहिए की

आदिवासी बहुल्य क्षेत्रो मे पुल पुलिया, सड़क, बिजली, बेहतर शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा रोजगार के साधन उपलब्ध कराया जाएं यह सब सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय भाजपा सरकार आदिवासी शब्द को हटाने क्यो प्राथमिकता दे रही है यह समझ से परे है भाजपा सरकार आखिर किस षड़यंत्र के तहत आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलने की साजिश कर रही है। जिला उपाध्यक्ष कृष्णा कुंजाम ने दो टुक शब्दों में कहा आदिम जाति महज एक शब्द समूह नहीं हैं, बल्कि यह आदिवासी समाज की वर्षों पुरानी संस्कृति और सर्वोच्च भावना को प्रकट करता है यह शब्द आदिवासियों के मान-सम्मान, पहचान, प्रतिष्ठा और विचारधारा की आत्मा से जुड़ा हुआ है सरकार को चाहिए की इस निर्णय पर पुनः विचार करे।

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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