कर्तव्य से नदारद प्रधान पाठिका: नरधा प्राथमिक शाला में औचक निरीक्षण के दौरान खुली पोल, ग्रामीणों और पालकों में भारी आक्रोश
कसडोल (बलौदाबाजार): छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में अपने पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बरतने और मनमर्जी से स्कूल संचालन करने का एक और गंभीर मामला सामने आया है। बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला नरधा में पदस्थ प्रधान पाठिका प्रिती बाला देवांगन के लगातार स्कूल से गायब रहने के कारण शैक्षणिक व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है।
ग्रामीण व सुदूर अंचल में संचालित इस प्राथमिक शाला में मुख्य रूप से गरीब व वंचित तबके के बच्चे अध्ययन करने आते हैं। शासन की मंशा जहाँ प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने की है, वहीं विद्यालय की मुखिया द्वारा विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने से बच्चों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है।
नरधा प्राथमिक शाला की चरमराती व्यवस्था को सुधारने के लिए पालक लंबे समय से प्रयासरत थे। इसी कड़ी में 23 अक्टूबर को पालकों, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों और संकुल समन्वयक ने मिलकर स्कूल का औचक निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण दल में मुख्य रूप से शामिल रहे:
- पुनीत राम दीवान (सरपंच, ग्राम पंचायत नरधा)
- नंद कुमार साहू (उप सरपंच) एवं समस्त पंचगण
- नरोत्तम दास महंत (संकुल समन्वयक)
निरीक्षण के दौरान शाला की संपूर्ण प्रशासनिक व शैक्षणिक जिम्मेदारी संभालने वाली प्रधान पाठिका प्रिती बाला देवांगन स्कूल से अनुपस्थित पाई गईं। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वे न तो विद्यालय में मौजूद थीं और न ही उन्होंने कोई पूर्व सूचना या विधिवत अवकाश आवेदन प्रस्तुत किया था। विद्यालय के सर्वोच्च पद पर आसीन शिक्षिका का यह गैर-जिम्मेदाराना आचरण देख उपस्थित जनप्रतिनिधि, संकुल समन्वयक और ग्रामीण दंग रह गए।
प्रधान पाठिका की इस मनमानी और लगातार अनुपस्थिति के चलते बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है। पालकों का कहना है कि जब विद्यालय की संस्था प्रमुख ही नियमों को ताक पर रखकर दायित्वों से मुंह मोड़ लेंगी, तो शाला का अनुशासन और अध्यापन कार्य किस स्तर का होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इस खुलासे के बाद से ग्रामीणों और पालकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
संयुक्त औचक निरीक्षण से नरधा स्कूल के वास्तविक प्रबंधन की पोल खुल चुकी है। इस घटनाक्रम ने कसडोल विकासखंड में संचालित सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग और प्रशासनिक देखरेख पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब क्षेत्रवासियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्कूल शिक्षा विभाग इस लापरवाह प्रधान पाठिका के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।



