बिलासपुर। 15 सितम्बर 2026 छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग की दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। बिलासपुर शहर की रहने वाली गंगा साहू भी इस योजना का लाभ लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। कभी घर-गृहस्थी तक सीमित रहने वाली गंगा साहू आज ई-रिक्शा चलाकर नियमित आमदनी अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग दे रही हैं।
योजना का लाभ मिलने से पहले गंगा साहू गृहणी थीं। उनका अधिकांश समय बच्चों की देखभाल और घर-गृहस्थी के कार्यों में बीतता था। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उनकी स्वयं की कोई नियमित आय नहीं थी। ऐसे समय में श्रम विभाग की दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना उनके लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया अवसर लेकर आई।
शासन से मिली सहायता के माध्यम से उन्हें ई-रिक्शा उपलब्ध हुआ। इसके बाद उन्होंने ई-रिक्शा संचालन को रोजगार के रूप में अपनाया। अब वे नियमित रूप से ई-रिक्शा चलाकर आमदनी अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई है।
गंगा साहू बताती हैं कि पहले वे केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं। योजना के माध्यम से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और खुद की आय अर्जित करने का अवसर मिला। अब वे परिवार के दैनिक खर्चों में आर्थिक सहयोग कर रही हैं। उनकी आय परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।
गंगा साहू के लिए ई-रिक्शा केवल रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि यह उनके लिए आत्मनिर्भरता, सम्मान और आत्मविश्वास का माध्यम बन गया है। अपने काम से वे यह संदेश भी दे रही हैं कि यदि महिलाओं को उचित अवसर और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले तो वे परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत भूमिका निभा सकती हैं।
दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना जैसी योजनाएं महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गंगा साहू ने शासन से मिली सहायता के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही उन्होंने अन्य महिलाओं से भी सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाने की अपील की है।
गंगा साहू की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलने पर महिलाओं के जीवन में रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खुल सकते हैं। एक गृहणी से स्वरोजगार से जुड़ी महिला बनने तक का उनका सफर परिवार और समाज में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में प्रेरणादायक संदेश देता है।