बच्चों को नशे के साथ-साथ नशे के कारोबारियों से बचाना भी जरूरी: अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी

BIRENDRA KUMAR SEN

September 15, 2026

बच्चों को नशे के साथ-साथ नशे के कारोबारियों से बचाना भी जरूरी: अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी

अवैध धंधे में बच्चों के इस्तेमाल पर जताई चिंता; कहा—निगरानी के बजाय विश्वास और संवाद बने परिवार की ढाल

रायपुर। बच्चों और किशोरों को केवल नशीले पदार्थों के सेवन से बचाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें नशे के अवैध कारोबारियों के चंगुल से सुरक्षित रखना भी आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने एक विशेष जन-जागरूकता आलेख के माध्यम से यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिज्ञासा, दोस्ती और थोड़े से आर्थिक लालच का गलत फायदा उठाकर तस्कर अक्सर नाबालिगों को संदिग्ध सामान या पैकेट पहुंचाने के काम (कूरियर) में फंसा लेते हैं।

जिज्ञासा और ‘आसान कमाई’ के लालच से बढ़ता है खतरा अधिवक्ता जोशी ने कहा कि किशोरावस्था में निर्णय क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में “सिर्फ एक बार” के प्रयोग से शुरू हुई बात लत में बदल जाती है। इसके बाद नेटवर्क से जुड़े असामाजिक तत्व बच्चों को ‘आसान कमाई’ और ‘कोई खतरा नहीं’ का झांसा देकर अवैध गतिविधियों का माध्यम बनाने की कोशिश करते हैं। बच्चों को यह आत्मविश्वास देना जरूरी है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के पार्सल या संदिग्ध प्रस्ताव को सीधे “ना” कह सकें।

निगरानी नहीं, विश्वास और संवाद है समाधान आलेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि माता-पिता डर या सख्ती का माहौल बनाने के बजाय बच्चों से ऐसा संवाद स्थापित करें, जिससे बच्चे संकट के समय बेझिझक अपनी बात साझा कर सकें। इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में डिजिटल सुरक्षा पर चर्चा और स्कूल स्तर पर व्यावहारिक सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

व्यवहार में बदलाव पर रखें नजर पढ़ाई में अचानक गिरावट, अत्यधिक गोपनीयता, अकारण पैसे की मांग या नए संदिग्ध संपर्कों जैसे बदलावों को केवल “उम्र का प्रभाव” मानकर अनदेखा न किया जाए। ऐसे लक्षणों पर शांति से बातचीत और समय पर विशेषज्ञों की मदद ली जानी चाहिए।

अभिभावकों के लिए अहम सुझाव: बच्चों को सिखाएं ये 7 बातें

  • किसी के दबाव या लालच में नशे का प्रयोग न करें।
  • अनजान व्यक्ति का कोई भी पैकेट या सामान लाने-ले जाने से बचें।
  • आसान पैसों के लालच में कोई भी संदिग्ध काम न करें।
  • सोशल मीडिया पर बने अनजान संपर्कों पर अंधा भरोसा न करें।
  • किसी के डराने या धमकाने पर बात छिपाएं नहीं।
  • कोई भी असहज परिस्थिति होने पर तुरंत माता-पिता या शिक्षकों को बताएं।
  • अनजाने में हुई गलती पर अकेले निर्णय लेने के बजाय बड़ों से मदद मांगें।

कानूनी सजगता और सामाजिक सहयोग की दरकार देश में NDPS Act, 1985 के तहत नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में कड़े प्रावधान हैं। अधिवक्ता जोशी ने कहा कि यदि कोई बच्चा जाने-अनजाने ऐसे मामलों में फंस जाए, तो घबराने या बात दबाने के बजाय तुरंत उचित विधिक और चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए। समाज को भी लत से प्रभावित बच्चों के प्रति सहानुभूति रखकर पुनर्वास पर ध्यान देना चाहिए, जबकि अवैध कारोबारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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