
रिपोर्टर टेकराम कोसले
बलौदा बाजार। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्राम ढनढनी से ग्राम पंचायत बरदा को जोड़ने वाली सड़क इन दिनों निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चा में है। सड़क की खराब हालत से जुड़े कुछ वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। इनमें बहुजन समाज पार्टी के युवा नेता एवं इंजीनियर रवि रविंद्र सड़क की डामरीकृत परत को हाथ से उखाड़कर दिखाते नजर आ रहे हैं। इन दृश्यों के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हाथ लगाने पर उखड़ती दिखाई दी डामर की परत
वायरल वीडियो में सड़क की ऊपरी डामरी परत कमजोर दिखाई देती है। रवि रविंद्र सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से से सामग्री निकालकर कैमरे के सामने दिखाते हुए निर्माण की मजबूती पर सवाल उठाते हैं। मौके की तस्वीरों में सड़क के किनारे और बीच हिस्से में दरारें, उखड़ी हुई सतह तथा जगह-जगह क्षतिग्रस्त डामर दिखाई दे रहा है।
हालांकि, सड़क की वास्तविक तकनीकी गुणवत्ता और निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग की तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है।
“दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है”
वीडियो में रवि रविंद्र प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने इस मार्ग की स्थिति दिखाते हुए व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष करते हैं। उनका कहना है कि वे सड़क के माध्यम से योजना, इंजीनियरिंग व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली की वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाना चाहते हैं।
उन्होंने कथित तौर पर ठेकेदार, इंजीनियर और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनके आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
जनता के पैसों से बनती है सड़क, गुणवत्ता से समझौता क्यों?
रवि रविंद्र का कहना है कि सरकारी सड़कों के निर्माण में खर्च होने वाला पैसा जनता के टैक्स और सरकारी बजट से आता है। ऐसे में जनता को मजबूत, टिकाऊ और निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप सड़क मिलना उसका अधिकार है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सड़क निर्माण के कुछ समय बाद ही डामर उखड़ने लगे और सतह पर दरारें दिखाई देने लगें, तो निर्माण एजेंसी तथा गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जानी चाहिए?
भ्रष्टाचार के लिए व्यवस्था के साथ जनता की चुप्पी पर भी सवाल
रवि रविंद्र ने अपने वीडियो में केवल अधिकारियों और ठेकेदारों पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि जनता की भूमिका को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उनका कहना है कि जब लोग गलत काम देखकर भी चुप रहते हैं और अपने अधिकारों को लेकर सवाल नहीं उठाते, तो इससे कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि सरकारी योजनाओं से होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखें और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभाग एवं प्रशासन के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
“सरकार से कौन लड़े, इंजीनियर से कौन सवाल करे?”
रवि रविंद्र ने कहा कि आम लोगों में अक्सर यह सोच रहती है कि सरकार या अधिकारियों से सवाल करना मुश्किल है। लेकिन उनके अनुसार लोकतंत्र में जनता को अपने अधिकारों और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर सवाल पूछने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि यदि जनता अपने क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता को लेकर आवाज उठाएगी, तभी जिम्मेदार व्यवस्था पर दबाव बनेगा।
“सुशासन लिख देने से सुशासन नहीं आता”
सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर भी रवि रविंद्र ने सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि केवल पोस्टर, बैनर और प्रचार में सुशासन लिख देने से जमीन पर सुशासन साबित नहीं होता। इसकी वास्तविक परीक्षा गांवों की सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति से होती है।
उनके मुताबिक यदि ग्रामीण क्षेत्र में बनने वाली सड़क की गुणवत्ता पर ही सवाल उठ रहे हैं, तो संबंधित विभाग को मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
ढनढनी-बरदा मार्ग की सामने आई तस्वीरों और वीडियो के बाद स्थानीय स्तर पर सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में मांग उठ रही है कि संबंधित विभाग द्वारा सड़क का तकनीकी निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण और निर्माण कार्य की जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार ठेकेदार, एजेंसी या संबंधित अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
वायरल तस्वीरों ने खड़े किए कई सवाल
26 अगस्त 2026 को लिए गए बताए जा रहे फोटो में बलौदा बाजार क्षेत्र और लवन के आसपास सड़क की क्षतिग्रस्त सतह दिखाई दे रही है। एक तस्वीर में सड़क किनारे डामर की परत उखड़ी हुई नजर आती है, जबकि दूसरी तस्वीर में सड़क के बीच हिस्से में क्षतिग्रस्त पैच दिखाई देता है। एक अन्य तस्वीर में रवि रविंद्र सड़क से निकली सामग्री को हाथ में लेकर दिखाते नजर आ रहे हैं।
इन तस्वीरों और वीडियो की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सड़क निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े आरोपों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभाग की जांच और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाना उचित होगा।
MASB NEWS का सवाल:
यदि सड़क निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हुआ है, तो संबंधित विभाग को इसकी तकनीकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि निर्माण में अनियमितता या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। जनता के पैसे से बनने वाली सड़क की मजबूती और गुणवत्ता ही वास्तविक विकास और सुशासन की कसौटी है।