महज 8 वर्ष की उम्र से के.आर. सिन्हा कर रहे हैं श्रीरामचरितमानस का नियमित पाठ,

BHUPENDRA SINHA

August 26, 2026

77 वर्ष की उम्र में भी पूरी ऊर्जा के साथ करते हैं मानस पाठ, बचपन की साधना को बनाया जीवन का संकल्प

छुरा /गरियाबंद :- सावन का पावन महीना आध्यात्मिक साधना, भक्ति और संयम के लिए विशेष माना जाता है। इसी आस्था और परंपरा को जीवन का हिस्सा बनाकर श्रीराघवेंद्र मानव संघ के संरक्षक, सेवानिवृत्त व्याख्याता एवं मानस मर्मज्ञ के.आर. सिन्हा पिछले करीब सात दशकों से श्रीरामचरितमानस का नियमित पाठ करते आ रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने महज 8 वर्ष की उम्र से मानस पाठ की शुरुआत की थी और आज 77 वर्ष की उम्र में भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस परंपरा को निभा रहे हैं।

के.आर. सिन्हा बताते हैं कि बचपन में वे पढ़ाई के लिए दो नदियां पार कर बरोंडा बाजार जाया करते थे। रास्ते में एक शिव मंदिर पड़ता था। वे अपने मित्रों के साथ बगनई नदी से जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करते और त्रिशूल पर चंदन लगाकर विद्यालय जाते थे। एक दिन विद्यालय से लौटते समय वे मंदिर का त्रिशूल घर ले आए और उस पर चंदन लगाने लगे। पिता ने जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने पूरी घटना बताई।

बचपन से भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा देखकर उनके पिता ने उन्हें श्रीरामचरितमानस का एक ग्रंथ भेंट किया। इसके बाद गांव के गुड़ी चौक में वे अपने साथियों के साथ मिलकर एक-एक अक्षर जोड़ते हुए मानस का पाठ करने लगे। उस समय आसपास की माताएं और बहनें भी रामायण सुनने के लिए एकत्रित होती थीं।

सिन्हा बताते हैं कि आज वे दोहा-चौपाई का वाद्य यंत्रों और संगीत के साथ सस्वर एवं द्रुतगति से गायन करते हैं, लेकिन बचपन में तुतलाती भाषा में हिज्जे जोड़कर किया गया मानस पाठ उन्हें आज भी अधिक आनंद देता है। उनके अनुसार उस दौर की वह बाल-सुलभ भक्ति और सरलता आज भी उनकी स्मृतियों में जीवंत है।

उन्होंने बताया कि उस समय से लेकर आज तक वे हर वर्ष पूरे सावन मास में सपरिवार श्रीरामचरितमानस का पाठ करते आ रहे हैं। सावन के अंतिम दिवस शिवलिंग का रुद्राक्ष की माला, बेलपत्र और धतूरा आदि से श्रृंगार कर विधिवत जलाभिषेक भी किया जाता है।

मानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की सीख,

के.आर. सिन्हा का कहना है कि श्रीरामचरितमानस का नियमित पठन-पाठन किया जाना चाहिए। यह केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। इसमें भक्ति और ज्ञान का अद्भुत संगम है। मानस माता-पिता के सम्मान, गुरु सेवा, भाईचारे, निष्काम भक्ति और मानवता का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस के पाठ से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति को जीवन में सदाचार, संयम तथा सेवा की प्रेरणा मिलती है। यही कारण है कि बचपन में शुरू हुई उनकी मानस साधना आज भी अनवरत जारी है और वे नई पीढ़ी को भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश दे रहे हैं।

सह संपादक

Share this content:

Leave a Comment