अटल बिहारी वाजपेई प्रतिमा निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

SARJU PRASAD SAHU

August 4, 2026

कोरबा। छत्तीसगढ़ में “अटल परिसर” योजना के तहत स्थापित भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमाओं के निर्माण में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना (गैर राजनीतिक संगठन) ने आवाज बुलंद की है। संगठन ने प्रधानमंत्री के नाम कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
संगठन का आरोप है कि राज्य के विभिन्न नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में “अटल परिसर” योजना के अंतर्गत स्थापित प्रतिमाओं के निर्माण में गुणवत्ता और स्वीकृत मानकों का पालन नहीं किया गया। ज्ञापन में विशेष रूप से कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में स्थापित अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा का उल्लेख किया गया है।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के अनुसार स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जिस प्रतिमा को स्वीकृति और प्रचार के दौरान धातु (मेटल) की प्रतिमा बताया गया था, उसकी जगह सीमेंट या कंक्रीट से निर्मित प्रतिमा स्थापित कर दी गई। आरोप है कि पहली ही बारिश में प्रतिमा की बाहरी परत क्षतिग्रस्त होकर धुलने लगी, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और उपयोग की गई सामग्री पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
संगठन का कहना है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला नहीं होगा, बल्कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई के सम्मान के साथ भी गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा। संगठन ने आशंका जताई है कि इसी प्रकार की अनियमितताएं प्रदेश के अन्य नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में स्थापित प्रतिमाओं के निर्माण में भी हुई हो सकती हैं। इसलिए पूरे राज्य में इस योजना के अंतर्गत बनाए गए सभी अटल परिसर और प्रतिमाओं की व्यापक जांच आवश्यक है।
ज्ञापन के माध्यम से छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना की प्रमुख मांगें
पूरे मामले की जांच के लिए केंद्र स्तर पर स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए।
छत्तीसगढ़ में “अटल परिसर” योजना के तहत स्थापित सभी अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमाओं की निर्माण गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, तकनीकी मानकों, स्वीकृत डिजाइन और व्यय की विस्तृत जांच कराई जाए।
निर्माण कार्यों से संबंधित निविदा, अनुबंध, भुगतान, गुणवत्ता परीक्षण और अन्य अभिलेखों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
संगठन ने उम्मीद जताई है कि मामले की निष्पक्ष जांच से यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे सार्वजनिक धन की सुरक्षा के साथ राष्ट्रीय नेताओं के सम्मान की भी रक्षा हो सके।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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