पलारी/बलौदाबाजार।विकासखंड पलारी के ग्राम लच्छनपुर स्थित श्री राम जानकी मंदिर आज एक बार फिर भावनाओं से सराबोर होगा। मंदिर के पूज्य पुजारी एवं महंत श्री परमानंद वैष्णव जी की पावन स्मृति में 24 जुलाई को तेरहवीं संस्कार, निशान पूजन एवं महंताई कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर संत-महात्माओं के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान, श्रद्धांजलि सभा एवं महाप्रसादी (भंडारा) का आयोजन होगा। समस्त संत समाज एवं आयोजकों ने श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में उपस्थित होकर श्रद्धासुमन अर्पित करने की अपील की है।
महंत श्री परमानंद वैष्णव जी का बैकुंठवास केवल एक संत का जाना नहीं, बल्कि लच्छनपुर की आध्यात्मिक चेतना के एक युग का विराम माना जा रहा है। वर्ष 1972 से लेकर अपने अंतिम समय तक लगभग 53 वर्षों तक उन्होंने श्री राम जानकी मंदिर की सेवा को ही अपना जीवन बना लिया। ग्रामीण बताते हैं कि उनके जीवन में भगवान श्रीराम, माता जानकी और मां महामाया की भक्ति के अलावा मानो कोई दूसरा उद्देश्य था ही नहीं। उनका हर दिन प्रभु की आराधना, मंदिर की सेवा और श्रद्धालुओं के कल्याण के लिए समर्पित रहता था। महंत श्री परमानंद वैष्णव जी ने मंदिर परिसर में ही एक साधक और तपस्वी की तरह अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत किया। मंदिर ही उनका घर था, भगवान की सेवा ही उनका जीवन था और गांव के लोग ही उनका परिवार थे। सुबह की पहली आरती से लेकर रात्रि की अंतिम पूजा तक उनका अधिकांश समय मंदिर की सेवा, पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन में ही गुजरता था। उन्होंने कभी व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं की इच्छा नहीं की। त्याग, तपस्या, सादगी और सेवा ही उनकी सबसे बड़ी पहचान रही।
ग्रामीण बताते हैं कि महंत श्री परमानंद वैष्णव जी का स्वभाव अत्यंत सरल, सहज और निष्कपट था। वे हर व्यक्ति की बात धैर्य और आत्मीयता से सुनते थे। गांव में यदि किसी के बीच मनमुटाव या ऊंची-नीची बात हो जाती थी, तो वे स्वयं व्यथित हो जाते थे। उनका हमेशा यही प्रयास रहता था कि गांव में प्रेम, भाईचारा और आपसी सौहार्द बना रहे। वे सभी को प्रेम, सद्भाव और धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देते थे। ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में महंत श्री परमानंद वैष्णव जी जैसा सीधा, सरल, निष्कपट और सेवाभावी व्यक्तित्व मिलना वास्तव में बहुत कठिन है।महंत श्री परमानंद वैष्णव जी के बैकुंठवास पर ग्राम पटेल दिलहरण यदु, ग्राम पंचायत सरपंच भूपेंद्र साहू, मनहरण साहू, शत्रुघ्न पटेल, डॉ. मनहरण, राजाराम फेकर सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, संत समाज, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महंत जी ने अपना संपूर्ण जीवन समाज, सनातन धर्म और मानव सेवा को समर्पित कर दिया। उनका स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन सदैव स्मरणीय रहेगा।
आज जब श्री राम जानकी मंदिर में तेरहवीं संस्कार का आयोजन होगा, तब हर श्रद्धालु की आंखें नम होंगी। मंदिर की घंटियों की ध्वनि, आरती की लौ और भजनों की मधुर स्वर लहरियों के बीच महंत श्री परमानंद वैष्णव जी की स्मृतियां हर किसी के हृदय को भावुक कर देंगी। लच्छनपुर के ग्रामीण कहते हैं कि ऐसे संत बार-बार जन्म नहीं लेते। उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। उनके जैसा सरल, निष्कपट और त्यागमयी व्यक्तित्व मिलना आसान नहीं है। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद, उनके संस्कार और उनकी सेवा की अमिट छाप श्री राम जानकी मंदिर और लच्छनपुर की मिट्टी में सदैव जीवित रहेगी।