बिलासपुर में आसमानी आफत: एक ही रात की बारिश से डूबा शहर, टूटने की कगार पर 30 साल का रिकॉर्ड

BIRENDRA KUMAR SEN

July 17, 2026

 

बिलासपुर में आसमानी आफत: एक ही रात की बारिश से डूबा शहर, टूटने की कगार पर 30 साल का रिकॉर्ड

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में बीती रात हुई मूसलाधार बारिश ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया, जिसने पूरे शहर की तस्वीर बदलकर रख दी। चंद घंटों की बारिश में शहर की प्रमुख सड़कें नदियों में तब्दील हो गईं, पॉश कॉलोनियां जलमग्न हो गईं और आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया। हालात इतने बदतर रहे कि लोगों को सुबह अपने घरों से निकलने तक के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।

​अब शहरवासियों और मौसम विज्ञानियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या पिछले 25 से 30 वर्षों में बिलासपुर में एक ही रात में इतनी अधिक बारिश कभी हुई थी? इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को खंगालने के लिए मौसम विभाग के पुराने आंकड़ों और प्रशासनिक अभिलेखों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।

​भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस आसमानी आफत को लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था। मौसम विभाग के अनुसार, 15 जुलाई से मध्य भारत और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के ऊपर एक बेहद सक्रिय लो-प्रेशर सिस्टम (कम दबाव का क्षेत्र) बना हुआ था। इसी सिस्टम के चलते मानसून अचानक उग्र हो गया।

रिकॉर्ड बारिश: IMD रायपुर के आधिकारिक वर्षा बुलेटिन के अनुसार, 17 जुलाई तक बिलासपुर जिले में कुल 276.2 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य मानसूनी बारिश के अनुमान से कहीं गुना अधिक है।

​क्या यह इतिहास की सबसे बड़ी बारिश है? मौसम विभाग और प्रशासनिक अभिलेखों के पुराने पन्ने पलटने पर पता चलता है कि बिलासपुर ने इससे पहले भी कई बार जलप्रलय का सामना किया है:

  • ऐतिहासिक वर्ष: इससे पहले साल 1994, 2001, 2013 और 2020 में भी बिलासपुर में ऐसी ही भीषण बारिश और भयंकर जलभराव दर्ज किया गया था।
  • सत्यापन का इंतजार: मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान 2026 की बारिश को ‘अब तक की सबसे ऐतिहासिक बारिश’ घोषित करने से पहले पुराने आधिकारिक आंकड़ों का अंतिम सत्यापन (Verification) किया जा रहा है।

​मौसम विशेषज्ञों और नगरीय निकाय के जानकारों का मानना है कि शहर के डूबने के पीछे केवल कुदरत का कहर नहीं, बल्कि इंसानी और प्रशासनिक लापरवाही भी बड़ी वजह है:

मुख्य कारण

जमीनी हकीकत

कमजोर ड्रेनेज सिस्टम

शहर की जल निकासी व्यवस्था इतनी भारी बारिश का दबाव झेलने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई।

सफाई में देरी

मानसून से पहले बड़े और छोटे नालों की समय पर और गाद (कीचड़) की सफाई नहीं की गई।

अंधाधुंध शहरीकरण

शहर के तेजी से हुए विस्तार के कारण प्राकृतिक जल निकासी के मार्ग पूरी तरह ब्लॉक हो गए।

अतिक्रमण की मार

कई इलाकों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण ने पानी के बहने के रास्तों को संकरा कर दिया है।

क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थिति

बेहद कम समय में अत्यधिक मात्रा में पानी बरसने (तीव्र वर्षा) के कारण पानी को निकलने का मौका ही नहीं मिला।

इस मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। बहरहाल, अब सभी की निगाहें मौसम विभाग के अंतिम आंकड़ों पर टिकी हैं। क्या 2026 की यह बारिश बिलासपुर के इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे डरावनी बारिश के रूप में दर्ज होगी? इसका आधिकारिक जवाब मौसम विभाग के अंतिम रिकॉर्ड सत्यापन के बाद ही साफ हो पाएगा।

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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