आवास के नाम पर अवैध रेत खनन का खेल, खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

SARJU PRASAD SAHU

July 4, 2026

देवभोग। क्षेत्र में आवास निर्माण की आड़ लेकर अवैध रेत खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। कागजों में 10 जून से अधिकृत रेत घाट बंद बताए जा रहे हैं, लेकिन तेल नदी के करलागुड़ा, निष्ठीगुड़ा, सेंदमुड़ा और खोकसरा सहित अन्य घाटों से दिन-रात बिना अनुमति रेत का उत्खनन होने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन 150 से अधिक ट्रैक्टरों के जरिए रेत का परिवहन किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार, रेत माफिया प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम का सहारा लेकर शासकीय भूमि, तालाबों और नदी-नालों से अवैध रूप से रेत निकाल रहे हैं। बाद में इसी रेत को दूर-दराज के क्षेत्रों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। कुछ ट्रैक्टर चालकों ने भी बताया कि रेत को “आवास निर्माण” के नाम पर ले जाया जाता है, जबकि अधिकांश रेत वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचने के बजाय व्यावसायिक निर्माण कार्यों में खपाई जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले की जानकारी खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन को होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे शासन को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।

लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से नदी-नालों और पारंपरिक जलस्रोतों का स्वरूप प्रभावित हो रहा है। ओवरलोड ट्रैक्टर मुख्य सड़कों और रिहायशी इलाकों से गुजर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

ग्रामीणों ने आवास योजना की आड़ में चल रहे इस कथित अवैध कारोबार की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वास्तविक आवास हितग्राहियों को आवश्यक छूट मिलनी चाहिए, लेकिन योजना की आड़ में सरकारी खनिज संपदा का दोहन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

अब यह देखना होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन सक्रिय होकर कार्रवाई करता है या फिर देवभोग क्षेत्र में अवैध रेत खनन का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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