डीजल की किल्लत से पंपों पर लग रही ट्रैक्टरों की बेकाबू भीड़

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

May 26, 2026

लवन/मुंडा। ईरान इजरायल और अमरीका युद्ध के चलते अभी हाल ही में महज 10 से 12 दिनो के भीतर ही डीजल पेट्रोल के दामों में चार बार बढ़ोतरी हुई है। मई माह में 15,19,22, और 25 मई को डीजल पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी होने के बावजूद पेट्रोल पंपो में डीजल की किल्लत हो रही है। वही अंचल में 13 और 14 मई को हुई झमाझम बारिश के बाद से खरीफ फसल के लिए अकरस की जुताई जारी है। अकरस जुताई के लिए डीजल नहीं मिलने के कारण पेट्रोल पंपो में ट्रैक्टरों की लंबी कतारे लग रही है। डीजल नहीं मिलने से कृषि कार्य खासकर अकरस की जुताई बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। आपूर्ति बाधित होने से पेट्रोल पंपों में कही एक हजार तो कही 1500 का ही डीजल दिया जा रहा है। इसी तरह डीजल और पेट्रोल की किल्लत लवन और लाहोद के पेट्रोल पंप में देखने को मिल रहा है। जहां पेट्रोल पंपो पर ईंधन लेने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है। 26 मई को सुबह 10 बजे के आसपास लाहोद के पेट्रोल पंप में लगभग 50 से अधिक ट्रैक्टर और बड़ी वाहनों की लंबी कतारे लगी रही। लंबी कतारे लगने से सड़क में जाम जैसी स्थिति बनी हुई थी। वही भीषण गर्मी के बीच घंटों लाइन में खड़े लोग प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ पेट्रोल पंपो में रात के अंधेरों में कर्मचारियों के द्वारा 1000 रूपये का डीजल पेट्रोल लेने पर 100 रूपये अतिरिक्त ले रहे हैं। खेती किसानी के महत्वपूर्ण समय में डीजल की बढ़ी मांग ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। हमारे इस प्रतिनिधि ने मंगलवार को लाहोद स्थित पेट्रोल पंप का दौरा किया जहां स्थित बेकाबू दिखी। पेट्रोल पंप के पास 50 से अधिक ट्रैक्टरो की लंबी लाइने लगी थी। पिकअप कार चालक ट्रक चालक भी घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। कई ट्रैक्टर चालक सड़क किनारे बैठकर अपने नंबर का इंतजार करते नजर आए। लच्छनपुर निवासी तिलक राम रजक ने बताया कि तेज धूप और उमस के बीच घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद 1500 रूपये का डीजल मिला। ऐसे में 500 रूपये का डीजल तो गांव पहुंचने में ही खर्च हो जाता है। आखिर अब करें तो करे क्या। मुंडा के मोरजध्वज वर्मा ने डीजल की किल्लत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि खेत की जुताई करनी है और धान की तैयारी चल रही है लेकिन डीजल पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलने से अकरस जुताई खेती कार्य पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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