करियर गाइडेंस एवं UPSC/PSC तैयारी मार्गदर्शन कार्यक्रम” में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, टाइम मैनेजमेंट, स्टडी प्लान, मॉक टेस्ट और सफलता के मूल मंत्र बताए गए। मुख्य वक्ता उमेन्द्र कौशिक ने कहा कि सही प्लानिंग, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से ही सफलता संभव है।
एक साल की सही प्लानिंग और धैर्य सफलता का मूल मंत्र – उमेन्द्र कौशिक
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों एवं युवाओं के मार्गदर्शन हेतु विशेष करियर गाइडेंस एवं UPSC/PSC तैयारी मार्गदर्शन कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सही अध्ययन पद्धति, समय प्रबंधन, अनुशासन तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की प्रभावी रणनीति से अवगत कराना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक एवं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं परिचय के साथ हुआ। मुख्य वक्ता उमेन्द्र कौशिक ने UPSC एवं PSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी को लेकर विद्यार्थियों को विस्तृत एवं प्रेरणादायक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सही दिशा, निरंतरता, धैर्य एवं अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को 1 वर्ष का स्टडी प्लान विस्तार से समझाते हुए बताया कि तैयारी के शुरुआती 3 महीनों में NCERT पुस्तकों के माध्यम से बेसिक नींव मजबूत करना जरूरी है। इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान एवं सामान्य अध्ययन जैसे विषयों की मूलभूत समझ विकसित करने के साथ प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ने और नोट्स बनाने की आदत डालने की सलाह दी गई।
उन्होंने बताया कि 4 से 6 महीनों के दौरान विद्यार्थियों को स्टैंडर्ड पुस्तकों का अध्ययन प्रारंभ कर देना चाहिए। इस चरण में करंट अफेयर्स, उत्तर लेखन अभ्यास एवं साप्ताहिक रिवीजन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। नियमित उत्तर लेखन अभ्यास से अभ्यर्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता एवं समय प्रबंधन में सुधार होता है, जो मुख्य परीक्षा में सफलता का महत्वपूर्ण आधार बनता है।
कार्यक्रम में 7 से 9 महीनों की तैयारी को प्रैक्टिस फेज बताते हुए नियमित मॉक टेस्ट, प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों का अभ्यास तथा कमजोर विषयों की पहचान कर सुधार करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में वही विद्यार्थी सफल होते हैं, जो अपनी कमियों को पहचानकर लगातार सुधार करते रहते हैं।
अंतिम 10 से 12 महीनों की तैयारी को “फाइनल तैयारी चरण” बताते हुए पूर्ण लंबाई वाले मॉक टेस्ट, नियमित रिवीजन एवं पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गंभीर अध्ययन करने की सलाह दी गई। उन्होंने कहा कि अंतिम समय में नया पढ़ने के बजाय पहले से पढ़े गए विषयों को मजबूत करना अधिक लाभकारी होता है।
दैनिक अध्ययन दिनचर्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिदिन 6 से 8 घंटे नियमित अध्ययन, 1 घंटा करंट अफेयर्स, उत्तर लेखन अभ्यास एवं नियमित रिवीजन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि “बिना रिवीजन के पढ़ाई अधूरी मानी जाती है।
कार्यक्रम में सफलता के लिए महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि Consistency सबसे जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन बनाए रखने, सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने एवं सकारात्मक सोच के साथ निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा दी।
मुख्य अतिथि भूपेंद्र शंकर सेन ने कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए सही मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थी भी सही रणनीति और मेहनत के बल पर UPSC एवं PSC जैसी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे परमानंद जी ने कहा कि शिक्षा एवं मार्गदर्शन से ही समाज और राष्ट्र का विकास संभव है। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया।
अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया गया तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।