कोरिया वन मंडल की विभागीय गाड़ियां बिना फिटनेस और पीयूसी के सड़कों पर दौड़ रहीं, सुरक्षा और नियमों पर उठे सवाल

SARJU PRASAD SAHU

May 11, 2026

कोरिया। वन एवं पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग खुद परिवहन और प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अनदेखी करता नजर आ रहा है। कोरिया वन मंडल में विभागीय वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। जानकारी के अनुसार विभाग के उपयोग में आने वाले एक ट्रक का फिटनेस प्रमाणपत्र पिछले लगभग 10 वर्षों से नवीनीकृत नहीं कराया गया है। इसके अलावा कई बोलेरो और अन्य विभागीय वाहन भी बिना वैध फिटनेस एवं प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली और सड़क सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर पर्यावरण संरक्षण और नियमों के पालन की जिम्मेदारी है, वही विभाग अपने वाहनों के दस्तावेजों को लेकर गंभीर लापरवाही बरत रहा है।

मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 56 के तहत किसी भी परिवहन वाहन के लिए वैध फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य है। वहीं केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार सभी वाहनों के लिए वैध पीयूसी प्रमाणपत्र रखना जरूरी है। ये नियम सरकारी और निजी दोनों प्रकार के वाहनों पर समान रूप से लागू होते हैं। सरकारी वाहनों को किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है।सूत्रों के मुताबिक विभाग के एक पुराने ट्रक का फिटनेस प्रमाणपत्र करीब 10 वर्षों से समाप्त है। परिवहन नियमों के जानकारों का कहना है कि इतने लंबे समय तक फिटनेस नवीनीकरण नहीं कराने की स्थिति में फिटनेस शुल्क, ग्रीन टैक्स, विलंब शुल्क और पेनाल्टी समेत अन्य औपचारिकताओं को मिलाकर खर्च हजारों से लेकर एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। यदि वाहन तकनीकी रूप से अनुपयुक्त पाया जाता है तो उसकी मरम्मत पर अलग से भारी खर्च आ सकता है।

वहीं विभागीय बोलेरो वाहनों के फिटनेस और पीयूसी प्रमाणपत्र भी समाप्त बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद इन वाहनों का नियमित उपयोग अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि कोई निजी वाहन मालिक बिना फिटनेस या पीयूसी के वाहन चलाता है तो परिवहन विभाग तत्काल चालानी कार्रवाई करता है, जबकि सरकारी विभागों के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं होती।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नियमों का पालन कराने वाले सरकारी विभाग खुद नियमों की अनदेखी क्यों कर रहे हैं। क्या संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों की स्थिति की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है। यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो विभागीय वाहनों के रखरखाव और दस्तावेजों के नवीनीकरण में बड़ी लापरवाही सामने आ सकती है।

इस संबंध में उपवन मंडलाधिकारी संतोष कुमार पांडेय ने कहा, “मैंने अभी-अभी कार्यभार संभाला है। मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है, दिखवाता हूं।”

संपादक { विज्ञापन‍ }

Share this content:

Leave a Comment