पीएम आवास योजना पर फैली अफवाहों का खंडन तकनीकी त्रुटि से बना विवाद, जांच के आदेश

SARJU PRASAD SAHU

April 30, 2026

कोरिया/सोनहत। ग्राम पंचायत कैलाशपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल खबरों को जनपद पंचायत सोनहत ने सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह मामला किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार से जुड़ा नहीं, बल्कि एक तकनीकी त्रुटि के कारण उत्पन्न हुआ विवाद है।

तकनीकी गड़बड़ी से बदली हितग्राही जानकारी प्राप्त जानकारी के अनुसार हितग्राही समयलाल और उनके भाई संतलाल दोनों ही योजना की स्थायी प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में पंजीयन के दौरान तकनीकी त्रुटि के चलते समयलाल की आवास आईडी में संतलाल की जानकारी दर्ज हो गई, जिससे पहली किस्त की राशि संतलाल के खाते में चली गई।

बाद में स्थानीय स्तर पर सुधार करते हुए समयलाल को 40 हजार रुपये की पहली किस्त उपलब्ध करा दी गई।

राशि मिलने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार समयलाल द्वारा पहली किस्त की राशि बैंक से निकाल ली गई है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अब तक आवास निर्माण शुरू नहीं किया है। मैदानी अमले द्वारा लगातार समझाइश दी जा रही है, पर वे राशि न मिलने का दावा करते हुए शिकायतें और भूख हड़ताल का सहारा ले रहे हैं।

दोहरा लाभ लेने के आरोप सूत्रों के मुताबिक समयलाल पूर्व में ग्राम पंचायत रजौली (धनपुर) के निवासी रहे हैं, जहां उनकी पत्नी शांति बाई वर्तमान में रह रही हैं और वहां भी आवास योजना का लाभ ले रही हैं। आरोप है कि कैलाशपुर में आवेदन के दौरान पत्नी की जानकारी छुपाकर दूसरा लाभ लेने की कोशिश की गई।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी समयलाल ने रोजगार सहायक पर 5 हजार रुपये की मांग का आरोप लगाया है, जबकि संबंधित कर्मचारियों ने इसे पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए निर्देश दिए थे।

भूख हड़ताल से दबाव बनाने की कोशिश स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि समयलाल तकनीकी त्रुटि को आधार बनाकर प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं। वहीं प्रशासन का दावा है कि दोनों हितग्राहियों को योजना का लाभ मिल चुका है—संतलाल को दो किस्त मिल चुकी हैं और उनका निर्माण कार्य जारी है।

3 सदस्यीय टीम गठित, 10 दिन में रिपोर्ट लगातार शिकायतों और विवाद को देखते हुए प्रशासन ने 3 सदस्यीय जांच टीम गठित कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में और क्या तथ्य सामने आते हैं।

पूरा मामला तकनीकी त्रुटि, आपसी विवाद और कथित दोहरे लाभ के आरोपों के बीच उलझा हुआ है। प्रशासन ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है, लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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