गरियाबंद:- जिले में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान राशि के वितरण को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। कलेक्टर कार्यालय गरियाबंद द्वारा जारी मार्च 2026 के एक ज्ञापन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 557 हितग्राहियों को 5,000 से 10,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह सहायता मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से दी गई, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत पहुंचाना है।
ज्ञापन के मुताबिक, अधिकांश हितग्राही छुरा एवं गरियाबंद विकासखंड से संबंधित हैं और कुल मिलाकर लगभग 33.50 लाख रुपये की राशि वितरित की गई है। हालांकि सूची सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी पारदर्शिता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सूची में शामिल कुछ नाम ऐसे हैं जो आर्थिक रूप से सक्षम या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तविक जरूरतमंदों को नजरअंदाज किया गया?
जनता के बीच प्रमुख सवाल यह हैं:
क्या स्वेच्छानुदान का लाभ सही पात्रों तक पहुंच रहा है?
क्या हितग्राहियों के चयन में पारदर्शिता बरती गई है?
क्या प्रशासन द्वारा जरूरतमंदों की निष्पक्ष जांच की जा रही है?
योजना की मंशा बनाम जमीनी हकीकत
मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान योजना का उद्देश्य गंभीर बीमारी, दुर्घटना या अन्य आपात स्थितियों में त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी या पक्षपात की आशंका सामने आती है, तो इससे योजना की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस का आरोप
इस मुद्दे पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने आरोप लगाया कि विधायक/सांसद की अनुशंसा से दी जाने वाली यह राशि गरीब, असहाय और जरूरतमंदों के लिए होती है, लेकिन सूची में भाजपा कार्यकर्ताओं के नाम शामिल होने से यह संकेत मिलता है कि पात्र हितग्राहियों के हक पर असर पड़ा है। उन्होंने इस पूरे मामले की कड़ी निंदा करते हुए इसे शासन-प्रशासन के संसाधनों के दुरुपयोग से जोड़ा।
प्रशासन का पक्ष
वहीं, इस संबंध में छुरा तहसीलदार मयंक अग्रवाल से संपर्क करने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वेच्छानुदान राशि से संबंधित पीडीएफ कलेक्टर कार्यालय से जारी हुआ है और विस्तृत जानकारी वहीं से प्राप्त की जा सकती है।
प्रशासन से अपेक्षा
अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखते हुए यह स्पष्ट करे कि किन मानकों के आधार पर हितग्राहियों का चयन किया गया। साथ ही भविष्य में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इस योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे।
निष्कर्ष
स्वेच्छानुदान राशि जनता के पैसे से दी जाती है, इसलिए इसका निष्पक्ष और न्यायसंगत वितरण अत्यंत आवश्यक है। यदि इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात की पुष्टि होती है, तो यह न केवल व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि जरूरतमंदों के अधिकारों का भी हनन होगा।