मंदिरों सहित घरों में बंदनवार और दीप सजाकर मनाया गया हिन्दू नववर्ष, छुईखदान में दिखा भक्ति का उल्लास

SARJU PRASAD SAHU

March 19, 2026

छुईखदान। हिन्दू नववर्ष एवं विक्रम संवत 2083 के शुभारंभ के अवसर पर छुईखदान नगर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। ब्राह्मण सामाजिक संगठन समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति इकाई एवं सहयोगियों द्वारा इस पावन अवसर पर विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

 

चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर प्रातःकाल नगर की विभिन्न कालोनियों एवं मंदिरों में घरों के मुख्य द्वार पर आमपत्र और पुष्पों से बने बंदनवार विधिवत पंचोपचार पूजन के साथ लगाए गए। साथ ही दीप प्रज्वलित कर नववर्ष का स्वागत किया गया।

विक्रम संवत भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है, जिसके अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठान एवं प्रमुख त्योहार जैसे नवरात्र, राम नवमी, महावीर जयंती, हनुमान जन्मोत्सव, विजयदशमी, दीपावली और होली मनाए जाते हैं। यह संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक माना जाता है।

मातृशक्ति इकाई की बहनों ने घर-घर जाकर बंदनवार सजाने के साथ दीप जलाकर नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। संध्या के समय रानी तालाब स्थित राजपुरोहित कुल देवी सत्ती माता मंदिर में दीप प्रज्ज्वलन एवं दीपदान किया गया। इस दौरान विधिवत पूजा-अर्चना कर भोग प्रसादी अर्पित की गई।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने भक्ति गीतों के साथ गरबा नृत्य प्रस्तुत किया और एक-दूसरे को कुमकुम तिलक लगाकर नववर्ष की बधाई दी। पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा।

इस आयोजन में जिला अध्यक्ष श्रीमती डॉली तिवारी, जिला सचिव श्रीमती स्वाति शर्मा, जिला उपाध्यक्ष रूपा उपाध्याय, जिला संगठन विस्तार प्रमुख श्रीमती शैल शर्मा सहित रेनू त्रिपाठी, रेणु चौबे, श्यामा तिवारी, अंजू तिवारी, गायत्री तिवारी, विमला शर्मा, सरिता शर्मा, रोहणी शर्मा, मीना तिवारी, लक्ष्मी तिवारी, मनीषा शुक्ला एवं सीमा मिश्रा ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

इसी तरह के कार्यक्रम खैरागढ़ और गंडई में भी आयोजित किए गए। खैरागढ़ में जिला संयोजिका अंजू पांडे एवं गंडई में जिला प्रभारी उमा चौबे के नेतृत्व में शीतला माता मंदिर परिसर में आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

हिन्दू नववर्ष और नवरात्रि का यह पर्व प्रकृति में नवचेतना और शक्ति उपासना का संदेश देता है, जिसे छुईखदान सहित आसपास के क्षेत्रों में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया।

सह संपादक

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