
रिपोर्टर टेकराम कोसले
कोरिया । छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां एक स्थानीय पत्रकार पर जानलेवा हमला कर दिया गया। इस घटना ने न सिर्फ पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।
मुख्य मार्ग पर रोका, फिर किया हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार शैलेश चंद्र गुप्ता को मुख्य सड़क पर रोककर आरोपी राजेंद्र प्रसाद साहू ने उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि पहले उन्हें सड़क पर पटक दिया गया और फिर लोहे के रॉड, डंडों व धारदार हथियार से हमला करने की कोशिश की गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के हस्तक्षेप से उनकी जान बच पाई, लेकिन हमले में उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
थाने में FIR नहीं, उल्टा पत्रकार से पूछताछ
घटना के बाद घायल पत्रकार सोनहत थाने पहुंचे, लेकिन वहां पुलिस का रवैया चौंकाने वाला रहा।
FIR दर्ज नहीं की गई
सादे कागज पर आवेदन लिया गया
थाना प्रभारी के सामने आरोपी पक्ष मौजूद था
पत्रकार से ही खबरों के प्रमाण मांगे गए
पीड़ित का आरोप है कि उन्हें ही कटघरे में खड़ा कर फटकार लगाई गई।
इलाज में देरी, हालत हुई गंभीर
गंभीर चोट के बावजूद पत्रकार को तुरंत अस्पताल नहीं भेजा गया। परिजनों के मुताबिक, उन्हें घंटों थाने में ही रोके रखा गया। बाद में परिजन खुद उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने सिटी स्कैन की सलाह देते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
महिलाओं से अभद्रता का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि थाने में मौजूद महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
SP से शिकायत, जांच का आश्वासन
न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक (SP) से लिखित शिकायत की। SP ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पशु तस्करी के खिलाफ पोस्ट बनी वजह?
सूत्रों के अनुसार, सोनहत क्षेत्र में रात के समय पशु तस्करी की गतिविधियों को लेकर पत्रकार ने सोशल मीडिया (व्हाट्सएप ग्रुप) में पोस्ट किया था। माना जा रहा है कि इसी वजह से आरोपी नाराज थे।
पत्रकारों में आक्रोश, सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस घटना के बाद क्षेत्र के पत्रकारों और आम लोगों में आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सच लिखना अब खतरनाक हो गया है?
निष्कर्ष
सोनहत की यह घटना बताती है कि पत्रकारिता करना आज भी जोखिम भरा हो सकता है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कितनी निष्पक्षता से कार्रवाई करती है या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।