जब चिरायु टीम बनी एक परिवार की उम्मीद, जन्मजात विकृति से जूझ रहे बच्चे को मिला नया जीवन

TEKRAM KOSLE

March 15, 2026

रिपोर्टर टेकराम कोसले

बिलासपुर, 15 मार्च 2026। जन्म के साथ ही गंभीर शारीरिक समस्या से जूझ रहे एक नन्हे बच्चे के चेहरे पर आज फिर से मुस्कान लौट आई है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह संभव हो पाया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की चिरायु टीम के प्रयासों और समय पर किए गए इलाज से।
लगभग छह माह पहले सीपत के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जन्मे इस बच्चे को जन्म से ही कटा-फटा होंठ और तालू (क्लैफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या थी। इस जन्मजात विकृति के कारण बच्चा अपनी माँ का दूध भी ठीक से नहीं पी पा रहा था। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण इलाज को लेकर बेहद चिंतित था।
इसी दौरान आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) की चिरायु टीम ने बच्चे की पहचान की और उसके माता-पिता से संपर्क कर उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। टीम ने करीब छह महीनों तक बच्चे का लगातार फॉलो-अप लिया। इस दौरान उसके वजन, ऊँचाई और सामान्य स्वास्थ्य की नियमित जांच की गई तथा आवश्यक दवाइयाँ भी उपलब्ध कराई गईं।
चिरायु टीम ने परिवार को भरोसा दिलाया कि ऑपरेशन के माध्यम से बच्चे की समस्या का समाधान संभव है। इसके बाद टीम के सहयोग से स्माइल ट्रेन संस्था के माध्यम से बिलासपुर के लाडिगर अस्पताल में बच्चे का सफल ऑपरेशन कराया गया। ऑपरेशन के बाद अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसके चेहरे पर सामान्य मुस्कान लौट आई है।
0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की होती है स्वास्थ्य जांच
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आरबीएसके मोबाइल हेल्थ टीम द्वारा स्कूलों, आंगनबाड़ियों, मदरसों और छात्रावासों में जाकर 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। प्रत्येक बच्चे का हेल्थ कार्ड बनाया जाता है, जिसमें उसकी पूरी स्वास्थ्य जानकारी दर्ज रहती है।
कार्यक्रम के तहत सामान्य बीमारियों के लिए दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि जटिल बीमारियों वाले बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर कर उपचार कराया जाता है। इसके लिए चिरायु वाहन की सुविधा भी उपलब्ध है।
बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण योजना
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2014 से संचालित यह कार्यक्रम “चिरायु” नाम से भी जाना जाता है। यह योजना बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
अपने बच्चे को स्वस्थ देखकर परिवार ने राहत की सांस ली है। माता-पिता का कहना है कि यदि समय पर चिरायु टीम का सहयोग नहीं मिलता तो उनके लिए इलाज कराना संभव नहीं था। आज उनके बच्चे के चेहरे पर लौटी मुस्कान ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी

सह संपादक

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