
श्रद्धा के साथ उमड़ेगा जनसैलाब, निशुल्क भंडारा की विशेष व्यवस्था
डभरा। सतनाम पंथ के आराध्य संत शिरोमणि गुरु घांसीदास जी की जन्मस्थली एवं तपोभूमि गिरौदपुरी धाम में 22 फरवरी 2026 से 24 फरवरी 2026 (रविवार, सोमवार और मंगलवार) तक भव्य गुरु दर्शन मेला आयोजित होगा। तीन दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
गिरौदपुरी धाम, जो कि छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आस्था का प्रमुख केंद्र है, में मेले के दौरान आध्यात्मिक वातावरण, सत्संग, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना के कार्यक्रमों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय रहेगा। श्रद्धालु जैतखाम के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे तथा गुरु परंपरा का स्मरण करेंगे।
2017 से निरंतर चल रहा निशुल्क भंडारा
मेले के अवसर पर तीन नंबर पुलिस चौकी के पास “ममतामयी मिनीमाता भंडारा प्रसादी गिरौदपुरी धाम” द्वारा वर्ष 2017 से निरंतर संत समाज एवं श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था की जा रही है। इस वर्ष भी विशाल भंडारे की तैयारी पूरी कर ली गई है।
भंडारा पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन की किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। संत समाज के साधु-संतों एवं आम श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थित पंडाल, बैठने की व्यवस्था तथा स्वच्छ भोजन वितरण की विशेष तैयारी की गई है।
सामाजिक समर्पण का उदाहरण

सामाजिक कार्यकर्ता एवं मिनीमाता भंडारा प्रसादी के पूर्व महासचिव अमिलाल घृतलहरे तथा अध्यक्ष गोपाल कुर्रे ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि यह सेवा पूर्णतः समाज के सहयोग और समर्पण से संचालित होती है। उनका उद्देश्य है कि गुरु धाम में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सम्मानपूर्वक प्रसादी भोजन उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने बताया कि संत शिरोमणि गुरु घांसीदास जी एवं बलिदानी राजा गुरु बालकदास जी की जन्मभूमि और तपोभूमि पर सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। समाज के सहयोग से हर वर्ष भंडारे का स्वरूप और अधिक विस्तृत किया जा रहा है।
प्रशासनिक तैयारी भी तेज
मेले को लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सुविधा और साफ-सफाई की व्यापक तैयारी की जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी चिकित्सा शिविर, पेयजल व्यवस्था और पार्किंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
गौरतलब है कि गिरौदपुरी धाम का गुरु दर्शन मेला छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां श्रद्धा, सेवा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।