छेरकापुर का आयुष्मान आरोग्य मंदिर: जर्जर भवन और सड़क किनारे चबूतरे पर बैठती मितानिन दीदियां, प्रशासन की उदासीनता सवालों के घेरे में

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

September 29, 2025

सह-संपादक

पलारी। विकासखंड पलारी के ग्राम पंचायत छेरकापुर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद गंभीर है। यहां का आयुष्मान आरोग्य मंदिर जर्जर हालात में है, जिसकी वजह से मितानिन दीदियों को अपनी बैठकें करने के लिए अब सड़क किनारे बने चबूतरे पर बैठना पड़ रहा है। हल्की बारिश या तेज धूप में भी वे इसी असुरक्षित जगह पर बैठकर अपने कार्यों की समीक्षा कर रही हैं।

भवन की दीवारें टूट-फूट का शिकार हैं, छत और पंखे गिर चुके हैं, प्लास्टर झड़ता रहता है, और आने वाले हर व्यक्ति के लिए हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है। साल भर पहले भवन की मरम्मत के लिए आवेदन दिए गए थे, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभी-अभी, एक महीने पहले भी भवन की मरम्मत के लिए नया आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

सीएचओ रूबी वर्मा ने स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “हमने साल भर पहले भी मरम्मत के लिए आवेदन दिया था, और अब एक महीने पहले नया आवेदन दिया गया है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पंखे गिरते हैं, प्लास्टर झड़ता है, और हादसों का खतरा हर समय बना रहता है।”

मितानिन दीदियों और ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता पर गंभीर खतरा है। मरीज भी भवन की जर्जर स्थिति और असुरक्षित बैठक व्यवस्था के कारण डर के साए में रहते हैं।

स्थानीय लोग और स्वास्थ्यकर्मी अब प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन सिर्फ आवेदन लंबित रहने की स्थिति को देखते रहेंगे या किसी बड़े हादसे के बाद जागेंगे?

ग्रामीण और मितानिन दीदियां मांग कर रहे हैं कि सरपंच, विधायक, बीएमओ, सीएमओ, कलेक्टर और मुख्यमंत्री इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लें और तुरंत भवन की मरम्मत या नए अस्पताल भवन का निर्माण सुनिश्चित करें।

छेरकापुर का आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब केवल स्वास्थ्य सेवा का केंद्र नहीं, बल्कि जानलेवा खतरे का प्रतीक बन चुका है। यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। अब शासन-प्रशासन को गंभीरता से स्थिति का जायजा लेना और तत्काल समाधान सुनिश्चित करना होगा।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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2 thoughts on “छेरकापुर का आयुष्मान आरोग्य मंदिर: जर्जर भवन और सड़क किनारे चबूतरे पर बैठती मितानिन दीदियां, प्रशासन की उदासीनता सवालों के घेरे में”

  1. Shasan prashasan ko ismein Kadi Dhyan Dena chahie kyunki swasthya Mandir hi behtar nahin rahenge to aam Janata ka Kya hoga isliye shasan prashasan ko ismein Kadi nigrani Dena chahie Kadi uchit prabandh karna chahie aur swasthya ka mandiron ko swachh rakhne chahie aur marmmat karana chahie dhanyvad

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