📰 अचानकमार की मिट्टी से निकली कला की खुशबू
🎨 रागिनी की गोंड चित्रकारी को मिला राष्ट्रीय सम्मान
🌿 गोंड चित्रकला में दिखाई वन, संस्कृति और संवेदना की अनूठी झलक
अचानकमार टाइगर रिज़र्व की प्रतिभाशाली युवा कलाकार रागिनी धुरवे ने अपने अद्भुत गोंड चित्रकला कौशल से राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ और मुंगेली जिले का मान बढ़ाया है। भारत सरकार की नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA), नई दिल्ली द्वारा आयोजित “Silent Conservation: From Margin to Centre” राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में रागिनी की कलाकृति का चयन किया गया।
नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में देशभर से चुने गए लगभग 50 कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित किया गया। रागिनी धुरवे की गोंड कला रचना को भारत के 14वें राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को सम्मानित करने हेतु प्रदर्शित किया गया। उनकी कलाकृति में अचानकमार के प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों और जनजातीय जीवन की सांस्कृतिक छवि को अत्यंत मनमोहक ढंग से उकेरा गया है।
🎭 कला, संस्कृति और परंपरा का संगम
अचानकमार टाइगर रिज़र्व केवल जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि जनजातीय कला, संस्कृति और परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है। रागिनी की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि इस भूमि की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़कर सृजन की नई ऊँचाइयाँ छू रही है।
🌟 स्थानीय प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान
रागिनी की सफलता से न केवल अचानकमार क्षेत्र, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनकी यह उपलब्धि राज्य की आदिवासी कला और लोक परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर नई दिशा प्रदान कर रही है।
गोंड कला के माध्यम से रागिनी ने यह सशक्त संदेश दिया है कि —
“प्रकृति और जंगलों के बीच भी सृजन की गूंज उतनी ही जीवंत है,
जितनी किसी महानगर में।”
जिले के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिकों ने रागिनी धुरवे को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उनकी यह सफलता निश्चित रूप से क्षेत्र के अन्य युवाओं को कला, संस्कृति और परंपरा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
बहुत अच्छा