रिपोर्टर: प्रमोद कुमार बंजारे, बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में शासकीय कर्मचारियों के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर कर्मचारी संगठनों में आक्रोश बढ़ गया है। प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि बिना ठोस सबूत के किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संघ के नेता रोहित तिवारी ने इस पूरे मामले को “सुनियोजित षड्यंत्र” बताते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा लगातार झूठी शिकायतें कर कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों में भय का माहौल बन रहा है।
🔍 जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
विवाद का केंद्र प्रदेश महामंत्री सुनील यादव से जुड़ा मामला है। संघ के अनुसार, जिला स्तर की चार सदस्यीय जांच समिति पहले ही आरोपों को निराधार बता चुकी है, इसके बावजूद दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू करना संदेह पैदा करता है।
रोहित तिवारी ने आरोप लगाया कि लगातार पत्राचार और दुष्प्रचार के जरिए कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
📄 मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन
कर्मचारी संघ ने कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए प्रमुख मांगें रखीं—
बिना प्रमाण के कर्मचारियों पर कार्रवाई न हो
झूठी शिकायत करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो
कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना से सुरक्षा दी जाए
⚠️ उग्र आंदोलन की चेतावनी
संघ ने दो टूक कहा कि यदि कर्मचारियों को निशाना बनाना बंद नहीं किया गया, तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इस मामले को लेकर अब सभी की नजरें प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस बढ़ते विवाद को कैसे सुलझाते हैं।