कोरबा । जिले में धान खरीदी व्यवस्था की अव्यवस्था अब किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। हरदीबाजार थाना क्षेत्र के ग्राम झांझ निवासी किसान बैसाखू गोंड़ (60 वर्ष) ने प्रशासनिक अनदेखी, आर्थिक तंगी और लगातार अपमान से आहत होकर कीटनाशक का सेवन कर लिया। यह घटना न केवल सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करती है, बल्कि किसानों की पीड़ा के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
अव्यवस्था बनी किसान की पीड़ा का कारण
प्राप्त जानकारी के अनुसार किसान बैसाखू गोंड़ के खेत का वास्तविक रकबा कम दर्ज किया गया था। धान विक्रय के लिए उन्हें टोकन, तौल और बिक्री की प्रक्रिया में बार-बार परेशान होना पड़ा। संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। लगातार उपेक्षा और आर्थिक संकट के चलते किसान पर मानसिक दबाव बढ़ता गया, जो अंततः इस दर्दनाक कदम में बदल गया।
इंसानियत की मिसाल बने निकिता मुकेश जायसवाल
किसान की हालत बिगड़ते देख सामाजिक कार्यकर्ता निकिता मुकेश जायसवाल ने बिना समय गंवाए मानवीय पहल की। उन्होंने तत्काल किसान को अपनी निजी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने किसान की पत्नी को तहसील परिसर के पास सुरक्षित छोड़ा और स्वयं अस्पताल में उपचार की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की। उनकी इस संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में आज भी इंसानियत जिंदा है और हर मजबूर किसान के साथ खड़े होने वाले लोग मौजूद हैं।
कलेक्टर ने लिया सख्त संज्ञान
मामले की जानकारी मिलते ही कलेक्टर कुणाल दुदावत ने इसे गंभीर बताते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने धान खरीदी से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश प्रशासन को दिए हैं।
चेतावनी है यह घटना
यह घटना प्रशासन के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि किसानों की समस्याओं की अनदेखी अब केवल कागजी लापरवाही नहीं रही, बल्कि यह सीधे जानलेवा साबित हो रही है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार और मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाया गया, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी सिस्टम को लेनी होगी।