बारनवापारा में प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को मिला डीजीपीएस सर्वे एवं वन्यजीव प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण

TEJASWI NATH SONI

January 29, 2026

बलौदाबाजार, 29 जनवरी 2026।
बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं को आधुनिक तकनीकों, आईटी आधारित वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे भावी वन अधिकारी फील्ड स्तर पर उपयोग होने वाली तकनीकों और प्रबंधन प्रक्रियाओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित हो सके।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्रीय निदेशक स्तोविषा समझदार ने डीजीपीएस (DGPS) तकनीक की कार्यप्रणाली, उपयोगिता एवं वन सर्वेक्षण, सीमांकन तथा प्रबंधन में इसके महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीजीपीएस आधारित सर्वेक्षण से वन क्षेत्रों में सटीक एवं विश्वसनीय डेटा संग्रह संभव होता है, जो दीर्घकालिक संरक्षण एवं प्रबंधन योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।

इसी क्रम में उप-निदेशक, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व वरुण जैन ने “गज संकेत” मोबाइल एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एप हाथी मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग, मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन तथा त्वरित सूचना साझा करने के लिए एक प्रभावी डिजिटल टूल है। प्रशिक्षु अधिकारियों को एप के फील्ड उपयोग, डेटा एंट्री एवं प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल टूल्स एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, साथ ही ऐसे प्रशिक्षण अधिकारियों को जमीनी स्तर पर बेहतर निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होते हैं।

वहीं अधीक्षक, बारनवापारा अभयारण्य कृषानू चन्द्राकर ने प्रशिक्षु अधिकारियों को अभयारण्य की भौगोलिक, पारिस्थितिक एवं संरक्षण संबंधी विशेषताओं की जानकारी दी। साथ ही अधिकारियों को वनभैंसा संरक्षण केंद्र, ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र, ग्रासलैंड विकास क्षेत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आधुनिक वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भावी वन अधिकारी तकनीकी रूप से सशक्त होकर बेहतर संरक्षण कार्य सुनिश्चित कर सकेंगे।

सह संपादक

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