भारतीय गणराज्य पर हिंदुत्व–कॉर्पोरेट गठजोड़ का खतरा डॉ. सिद्धार्थ रामू

SARJU PRASAD SAHU

January 28, 2026

नई दिल्ली | 26 जनवरी 2026 वरिष्ठ पत्रकार और आंबेडकरवादी विचारक डॉ. सिद्धार्थ रामू ने कहा है कि भारतीय लोकतांत्रिक गणराज्य आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। उनके अनुसार, हिंदुत्व और कॉर्पोरेट पूंजी के गठजोड़ ने संविधान, सामाजिक समता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला किया है।

डॉ. रामू ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रकाशित अपने आलेख में कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव समता, स्वतंत्रता और बंधुता पर टिकी है, जबकि हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना जन्म-आधारित श्रेष्ठता, जाति-व्यवस्था और महिलाओं पर पुरुष वर्चस्व को बढ़ावा देती है, जो लोकतंत्र से मूलतः असंगत है।

उन्होंने डॉ. आंबेडकर के उद्धरणों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्र न केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों बल्कि दलितों, आदिवासियों और अन्य वंचित वर्गों के लिए भी गंभीर खतरा है। डॉ. रामू के अनुसार, आंबेडकर ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि सामाजिक और आर्थिक असमानता को समाप्त नहीं किया गया, तो राजनीतिक लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा।

आलेख में देश में बढ़ती आर्थिक असमानता पर भी चिंता व्यक्त की गई है। वर्ल्ड इन-इक्वैलिटी लैब के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि देश की कुल संपदा का बड़ा हिस्सा मात्र 1 से 10 प्रतिशत लोगों के हाथों में केंद्रित होता जा रहा है, जबकि दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग, किसान और मजदूर इस संपदा से लगभग पूरी तरह बाहर हैं।

डॉ. रामू ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि बढ़ती कॉर्पोरेट संपदा का सीधा लाभ सत्ताधारी दल को मिल रहा है, जिससे लोकतंत्र के “हाईजैक” होने का खतरा पैदा हो गया है। उनके अनुसार, कॉर्पोरेट पूंजी के प्रभाव से नीतियां, मीडिया और चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो रही हैं।

आलेख में यह भी कहा गया है कि डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक समता के लिए ब्राह्मणवाद और आर्थिक समता के लिए पूंजीवाद को श्रमिकों का सबसे बड़ा शत्रु बताया था। उन्होंने ‘राजकीय समाजवाद’ के माध्यम से भूमि और बड़े उद्योगों के राष्ट्रीयकरण का प्रस्ताव रखा था, ताकि आर्थिक समानता सुनिश्चित हो सके।

डॉ. रामू ने जोर देकर कहा कि आंबेडकर की परिकल्पना का भारत — गणतंत्रात्मक, बंधुता-आधारित, बुद्धमय और प्रबुद्ध भारत — वर्तमान हिंदुत्व–कॉर्पोरेट मॉडल के ठीक विपरीत है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे संविधान, स्वतंत्रता, समता और बंधुता की रक्षा के लिए संगठित होकर इस गठजोड़ का विरोध करें।

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