रायगढ़ में अफीम की खेती का ‘सिंडिकेट’? तमनार के बाद अब लैलूंगा में खुलासा; सवालों के घेरे में प्रशासन
रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध अफीम की खेती का जाल गहराता जा रहा है। तमनार में हुई बड़ी कार्रवाई के महज तीन दिन बाद अब लैलूंगा विकासखंड के घटगांव में अफीम की फसल मिलने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। एक के बाद एक सामने आ रहे इन मामलों ने जिले के खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
लैलूंगा के घटगांव में चल रही इस अवैध खेती का भंडाफोड़ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस संबंध में जानकारी साझा की, जिसके बाद क्षेत्र में यह मुद्दा आग की तरह फैल गया। राजनीतिक गलियारों से जानकारी सार्वजनिक होने के बाद प्रशासन आनन-फानन में हरकत में आया है।
गौरतलब है कि अभी तीन दिन पहले ही तमनार थाना क्षेत्र के आमघाट में पुलिस और प्रशासन ने अफीम की अवैध खेती पकड़ी थी। उस मामले की स्याही सूखी भी नहीं थी कि लैलूंगा में दोबारा अफीम मिलने से यह साफ हो गया है कि जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती का एक सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा है।
इन घटनाओं ने जिला प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों और जानकारों के बीच चर्चा है कि:
- इतने बड़े पैमाने पर हो रही खेती की भनक स्थानीय पटवारी, कोटवार और बीट पुलिस को क्यों नहीं लगी?
- क्या जानबूझकर इन अवैध गतिविधियों को संरक्षण दिया जा रहा है?
- जब भाजपा नेता सोशल मीडिया पर जानकारी दे सकते हैं, तो प्रशासन का सूचना तंत्र इतना विफल क्यों है?
सिर्फ रायगढ़ ही नहीं, बल्कि प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों में अब तक अफीम की अवैध खेती के मामले उजागर हो चुके हैं। यह इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती के जरिए किसी बड़े अवैध कारोबार की नींव रखी जा रही है।
वर्तमान स्थिति: प्रशासन ने अब जांच और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटगांव में जमीन के मालिक और इस खेती के पीछे के असली मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है।