अंकिता भंडारी केस नई FIR और CBI जांच पर उठे सवाल, कॉलिन गोंसाल्वेस ने जताई आशंका

SARJU PRASAD SAHU

February 9, 2026

नई दिल्ली | अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI जांच शुरू होने के बावजूद जनता और पीड़ित परिवार के बीच असंतोष बना हुआ है। इसी बीच 9 जनवरी को दर्ज नई FIR को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने इस पूरी प्रक्रिया पर संदेह जताते हुए कहा है कि जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं दिखती।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा से बातचीत में कॉलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि नई FIR दर्ज कराने वाले व्यक्ति डॉ. अनिल प्रकाश जोशी का इस मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। “ऐसा व्यक्ति, जिसे केस की वास्तविक जानकारी नहीं है, वह FIR कैसे दर्ज करा सकता है? इससे संदेह पैदा होता है,” उन्होंने कहा।

सरकारी हस्तक्षेप का आरोप

गोंसाल्वेस का मानना है कि इस नई FIR के पीछे सरकारी हस्तक्षेप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि FIR में यह उल्लेख किया गया है कि मर्डर केस के आरोपी सजा पा चुके हैं, जबकि एक कथित VIP कड़ी अब भी सामने नहीं आई है। “पुरानी जांच को उसी बिंदु से आगे बढ़ाया जाना चाहिए था। नया केस बनाकर जांच को अलग दिशा में नहीं ले जाया जा सकता, उन्होंने स्पष्ट किया।

CBI जांच पर भरोसा क्यों नहीं?

सरकार के CBI जांच शुरू कराने के दावे पर जनता के असंतोष को लेकर गोंसाल्वेस ने कहा, “अगर सरकार एक तरफ CBI जांच की बात करे और दूसरी तरफ उसी जांच को नियंत्रित करे, तो भरोसा कैसे बनेगा? हमें फ्री एंड फेयर इन्वेस्टिगेशन चाहिए।”

एक अपराध, दो FIR?

कानूनी सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि एक ही अपराध में दो FIR नहीं चल सकतीं। “सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं। पुराने केस को बंद कर नया केस खड़ा करना गलत है। पुराने केस को रीओपन कर वहीं से जांच आगे बढ़नी चाहिए,” गोंसाल्वेस ने कहा।

धाराओं और जांच की दिशा पर सवाल

नई FIR में हत्या से सीधे जुड़ी धाराओं के अभाव पर उन्होंने चिंता जताई। “यह मर्डर केस है। सबूत मिटाने और आरोपी को बचाने की धाराएं लगाई गई हैं, लेकिन हत्या की साजिश और VIP भूमिका पर फोकस नहीं है,” उन्होंने कहा।

क्राइम सीन ध्वस्त करने पर संदेह

रिजॉर्ट के उस हिस्से को बुलडोजर से गिराए जाने पर गोंसाल्वेस ने इसे बेहद संदिग्ध बताया। “क्राइम सीन को नष्ट करना गंभीर सवाल खड़े करता है। किसके आदेश पर और क्यों ऐसा किया गया? जब जांच चल रही थी तब सबूत क्यों मिटाए गए?” उन्होंने कहा कि CBI को इसकी अलग से जांच करनी चाहिए।

मोबाइल और CCTV अहम सबूत

मोबाइल फोन और CCTV फुटेज गायब होने को उन्होंने जांच का केंद्रीय मुद्दा बताया। “अंकिता का फोन नहीं मिला, स्टाफ और आरोपियों के फोन गायब हैं। घटना के समय CCTV बंद होना सामान्य बात नहीं है,” उन्होंने कहा।

न्यायिक निगरानी की मांग

परिवार और संगठनों की सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट द्वारा CBI जांच की मॉनिटरिंग की मांग पर गोंसाल्वेस ने कहा कि स्वतंत्र न्यायिक निगरानी से भरोसा बहाल हो सकता है। फिलहाल ऐसा कोई आदेश नहीं है, इसी वजह से जनता असंतुष्ट है।

न्याय की उम्मीद?

आखिर में उन्होंने कहा, “इस समय उम्मीद कम दिखती है। शुरुआत से राजनीतिक प्रभाव नजर आता है। लेकिन हम चाहते हैं कि जांच स्वतंत्र हो। व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो, दोषी है तो उसे सजा मिलनी चाहिए।”

गौरतलब है कि 8 फरवरी को इस मामले को लेकर महापंचायत प्रस्तावित है, जिसमें करीब 40 संगठन और पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर एकजुट होने जा रहे हैं।

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