बलौदाबाजार-भाटापारा । 28 दिसंबर 2025: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखने लगा है। राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी की सुव्यवस्थित व्यवस्था और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान के फैसले ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में आर्थिक खुशहाली का नया संचार है।
मीना साहू की कहानी: सुगमता और सम्मान की मिसाल
सकरी धान उपार्जन केंद्र में अपनी उपज बेचने पहुँची महिला किसान मीना साहू ने धान विक्रय के अपने अनुभव साझा किए। उनके पास कुल 1.5 एकड़ कृषि भूमि है, जिससे उन्होंने 70 कट्टा धान का विक्रय किया। मीना के अनुसार, पूरी प्रक्रिया इतनी सुगम रही कि उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
उपार्जन केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम
मीना साहू ने केंद्र की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए बताया कि:
पारदर्शिता: तौल प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।
संसाधन: बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता से काम समय पर पूरा हुआ।
सुविधाएं: केंद्रों पर पेयजल और छाया के इंतजामों ने किसानों को काफी राहत पहुंचाई है।
“सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदना छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे हमें अपनी मेहनत का सही दाम मिल रहा है और हमारा परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है।”
मीना साहू, महिला किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
राज्य सरकार की इन नीतियों को किसान-हितैषी बताते हुए मीना साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री के संकल्प से आज प्रदेश का किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। सुशासन की इस नई व्यवस्था ने किसानों के मन में यह विश्वास जगाया है कि सरकार उनके हक और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है।
छत्तीसगढ़ में लागू यह प्रगतिशील कदम न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है, बल्कि किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में भी मील का पत्थर साबित हो रहा है।