संयुक्त जांच में सुरक्षा मानकों व एसओपी के गंभीर उल्लंघन की पुष्टि
बलौदाबाजार । 23 जनवरी 2026 तहसील भाटापारा अंतर्गत ग्राम बकुलाही स्थित मेसर्स रियल इस्पात एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में 22 जनवरी को हुई भीषण औद्योगिक दुर्घटना के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर कारखाना प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस का जवाब एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांच में पाया गया कि कारखाना प्रबंधन ने कारखाना अधिनियम 1948 एवं छत्तीसगढ़ कारखाना नियमावली 1962 के प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन किया है। जांच में यह भी सामने आया कि किल्न क्रमांक-01 को शटडाउन किए बिना संचालन जारी रखा गया और श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य कराया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, डस्ट सेटलिंग चेंबर में जमे गर्म ऐश को वेट स्क्रैपर में गिराने के दौरान उचित कार्य अनुमति (वर्क परमिट) जारी नहीं की गई। इसके अलावा, नवनियुक्त श्रमिकों को बिना सुरक्षा प्रशिक्षण एवं अनुमति के खतरनाक कार्यस्थल में नियोजित किया गया, जो कारखाना प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
जांच में यह भी पाया गया कि उद्योग ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से वाणिज्यिक उत्पादन की अनुमति नहीं ली, जो राज्य की उद्योग नीति के विपरीत है। वहीं न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत श्रमिकों के वेतन एवं सुविधाओं से संबंधित पंजी उपलब्ध नहीं कराए गए।
संविदा श्रमिक अधिनियम 1970 एवं ठेका श्रमिक (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम 1973 के अंतर्गत आवश्यक अनुज्ञप्ति के बिना 100 से अधिक श्रमिकों से कार्य लिया जा रहा था। इसके साथ ही अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम 1979 के नियमों का भी उल्लंघन पाया गया।
मृतकों व घायलों को मुआवजा भुगतान
हादसे में मृत 5 श्रमिकों के परिजनों को कारखाना प्रबंधन द्वारा 20-20 लाख रुपये तथा 6 घायल श्रमिकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा राशि का भुगतान किया जा चुका है। गंभीर रूप से घायल श्रमिकों का उपचार बिलासपुर में जारी है।
हादसे का विवरण
गौरतलब है कि 22 जनवरी 2026 को सुबह लगभग 9:40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल में कार्य के दौरान अचानक विस्फोट हुआ और गर्म ऐश की बौछार से 6 श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच के बाद कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 40(2) के तहत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया है।