सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले की आदर्श पंचायत कहलाने वाला ग्राम कैथा इन दिनों अवैधानिक सामाजिक फरमानों को लेकर सुर्खियों में है। आरोप है कि हाल ही में चयनित ग्राम पदाधिकारियों द्वारा कानून और संविधान को दरकिनार कर मनमाने आदेश जारी किए जा रहे हैं, जिससे गांव में भय और अराजकता का माहौल बन गया है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार जो साई प्रसाद का पहले एजेंट थे ओ आज ग्राम अध्य्क्ष ईश्वर साहू, पंच अरुण साहू, कोसा अध्यक्ष श्रीराम साहू एवं पंच लोकेश साहू के नेतृत्व में कथित तौर पर ‘तालीबानी फरमान’ जारी किए जा रहे हैं। किसी को सामाजिक बहिष्कार की धमकी देना, तो किसी को गाली-गलौज और मारपीट की चेतावनी देना अब आम बात बनती जा रही है।
आरोप यह भी है कि गांव के ही मेदराम साहू (शिक्षक) द्वारा पीड़ित परिवार की मदद करने वालों को दौड़ा दौड़ा मारने की बात खुलेआम दी गई थी। वहीं 13 पाठकी समाज के अंतर्गत एक पंच की धान कटाई के दौरान दबंग पदाधिकारियों द्वारा हार्वेस्टर को जबरन रोकने का प्रयास किया गया।
इतना ही नहीं, एक पत्रकार द्वारा अपने निजी भूमि गिरवी रखा था जिसके पेपर को सार्वजनिक कर दिया गया जिसको लेकर भी विवाद खड़ा हुआ, जिससे संबंधित व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब गांव की संकुचित और असंवैधानिक मानसिकता को दर्शाता है।
हैरानी की बात यह है कि जिस ग्राम कैथा को बिलाईगढ़ जनपद का सबसे शिक्षित गांव कहा जाता है, वहीं इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग इस मामले को दबाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं, जिसके चलते शिकायतों के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी है।
पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आत्मदाह जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी गांव के फरमान करने वाले और, कानून व्यवस्था की होगी।