कोरबी-हरदी बाजार में ‘नल-जल मित्र’ प्रशिक्षण संपन्न, अब ग्रामीण संभालेंगे जल प्रबंधन की जिम्मेदारी

TEKRAM KOSLE

March 12, 2026

रिपोर्टर टेकराम कोसले

कोरबी , 12 मार्च 2026।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति और जल संरचनाओं के बेहतर रख-रखाव को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) द्वारा कोरबी और हरदी बाजार में एक दिवसीय ‘नल-जल मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का सफल आयोजन किया गया। बुधवार 11 मार्च 2026 को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों से आए नल-जल मित्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जल प्रबंधन से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण के दौरान नल-जल मित्रों को पाइपलाइन में लीकेज की पहचान, उसकी मरम्मत की प्रक्रिया और जलापूर्ति प्रणाली के सुचारू संचालन की व्यावहारिक जानकारी दी गई। साथ ही जल स्रोतों के नियमित संधारण (मेंटेनेंस) और जल संरक्षण के विभिन्न तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने प्रतिभागियों को बताया कि यदि जल संरचनाओं का सही ढंग से रख-रखाव किया जाए तो हर घर तक शुद्ध पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।
कार्यक्रम में ग्रामीणों की भागीदारी को बढ़ावा देने और पानी के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता पैदा करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने नल-जल मित्रों को जल प्रबंधन की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि इनके सहयोग से गांवों में जल व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर विभाग की ओर से परियोजना समन्वयक गोविंद निषाद, रवि केसरी, रोबिन एक्का एवं जितेन्द्र राजपूत ने प्रशिक्षणार्थियों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित नल-जल मित्र गांवों में जल आपूर्ति प्रणाली की निगरानी और रख-रखाव में अहम भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत कोरबी के सरपंच विजय सिंह, सरपंच प्रतिनिधि पीतर सिंह मरकार (धतूरा), बजरंग प्रसाद, छत्रपाल सिंह, मनहरण सोनी, कुंवर सिंह राज, राजकुमार पटेल, कृष्ण कुमार, नारायण सिंह, प्रमोद बंजारे, समारू कैवर्त तथा विनोद कुमार मरकाम सहित अनेक ग्रामीणों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रशिक्षण के समापन पर नल-जल मित्रों ने अपने-अपने गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ाने में सहायक रहा, बल्कि ग्राम स्तर पर आत्मनिर्भर और विकासोन्मुख जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

सह संपादक

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