मार्च माह में ही प्यासा हुआ लच्छनपुर: हैंडपंप-बोरवेल सूखे, तालाब खाली, नल-जल योजना भी बेअसर

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

March 9, 2026

लच्छनपुर। गर्मी की दस्तक से पहले ही पलारी ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत लच्छनपुर में जल संकट ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया है। मार्च महीने में ही हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। गांव में पानी की किल्लत को लेकर लोगों में चिंता के साथ-साथ आक्रोश भी बढ़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी से यह स्थिति है तो मई-जून की भीषण गर्मी में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब गर्मी अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई है तो आने वाले दिनों में गांव का क्या हाल होगा।
ग्राम पंचायत लच्छनपुर में पानी की आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से की जाती है। यह पाइपलाइन ग्राम पंचायत ठेलकी के एक बोरवेल से जुड़ी हुई है, जहां से गांव में पानी पहुंचाया जाता है। लेकिन यह व्यवस्था पूरे गांव की जरूरतों को पूरा करने में असफल साबित हो रही है। कई बार पाइपलाइन से पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मोहल्लों में तो लोगों को घंटों इंतजार करने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
गांव में जल स्रोत तेजी से खत्म होते जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव के कई हैंडपंप और बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं। हालात यह हैं कि लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। कुछ परिवारों को दूर-दूर तक जाकर पानी लाना पड़ रहा है। पानी की कमी का असर अब गांव के सामान्य जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। घरों में पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए भी पानी का गंभीर संकट बना हुआ है। इस संकट का सबसे ज्यादा बोझ महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। पशुओं की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। गांव में मौजूद अधिकांश छोटे तालाब अभी से सूख चुके हैं। एक-दो बड़े तालाबों को छोड़ दिया जाए तो बाकी तालाबों में पानी लगभग समाप्त हो गया है। इससे पशुपालकों के सामने भी गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार की नल-जल योजना भी पर्याप्त जल स्रोत नहीं मिलने के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है। जिस योजना से गांव के हर घर तक पानी पहुंचाने का सपना दिखाया गया था, वही योजना गर्मी आने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है।
ग्राम पंचायत लच्छनपुर के सरपंच भूपेंद्र साहू ने बताया कि गांव की पानी की समस्या को लेकर प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र की नहर में पानी छोड़ा जाता है तो आसपास के क्षेत्रों का जल स्तर बढ़ जाता है, जिससे कुओं और बोरवेल में पानी की उपलब्धता बेहतर हो जाती है। लेकिन फिलहाल नहर में पानी नहीं होने के कारण जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और गांव में जल संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि नहर से गांव के निस्तारी तालाब तक नाली निर्माण की मांग ग्रामीण कई वर्षों से लगातार कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नहर से निस्तारी तालाब तक स्थायी नाली का निर्माण कर दिया जाए तो हर बार नहर में पानी छोड़े जाने पर तालाब स्वतः भर सकेंगे। इससे न केवल तालाबों में लंबे समय तक पानी बना रहेगा बल्कि आसपास के क्षेत्र का भू-जल स्तर भी बढ़ेगा। ग्रामीणों के अनुसार नहर का पानी तालाब तक पहुंचने से पूरे गांव के लिए यह एक स्थायी समाधान बन सकता है। इससे गांव के लोग नहाने-धोने और अन्य दैनिक कार्यों के लिए तालाब का उपयोग कर सकेंगे, वहीं पशुओं के लिए भी पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो सकेगी। साथ ही तालाबों में पानी रहने से आसपास के कुएं और बोरवेल भी पुनः जीवित हो सकते हैं, जिससे गांव में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। ग्रामीणों का कहना है कि नहर से निस्तारी तालाब तक नाली निर्माण केवल एक छोटी मांग नहीं बल्कि पूरे गांव के भविष्य से जुड़ा हुआ बड़ा समाधान है। यदि इस योजना को गंभीरता से लागू किया जाए तो लच्छनपुर में हर साल गर्मी के मौसम में खड़ा होने वाला जल संकट काफी हद तक समाप्त हो सकता है।
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से जोरदार मांग की है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द नहर से निस्तारी तालाब तक नाली निर्माण का कार्य स्वीकृत किया जाए और इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। साथ ही गांव के सभी सूख चुके तालाबों और कुओं का गहरीकरण कराया जाए, ताकि बारिश के पानी का अधिक से अधिक संचयन हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए यदि लोगों को हर साल संघर्ष करना पड़े तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। इसलिए प्रशासन को अब केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस और स्थायी कदम उठाने होंगे, ताकि लच्छनपुर के लोगों को आने वाले समय में जल संकट से स्थायी राहत मिल सके।

सह संपादक

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