खलारी रोपवे हादसा: सिस्टम की ‘आईसीयू’ में दम तोड़ती मानवता, घायल गोविंद स्वामी की मौतO
रायपुर/खलारी: खलारी रोपवे हादसे ने आज एक और दर्दनाक मोड़ ले लिया। एमएमआई हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे घायल गोविंद स्वामी ने आज दम तोड़ दिया। यह मौत महज एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की उस बदहाली की गवाही दे रही है जिसे देखकर रूह कांप जाए।
परिजनों ने जो आपबीती सुनाई है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जिस सरकारी एंबुलेंस से घायल को अस्पताल लाया जा रहा था, वह खुद मौत का डिब्बा बनी हुई थी।
- टूटा कांच: रास्ते में एंबुलेंस का शीशा अचानक टूटकर परिजनों पर ही गिर गया।
- फेल लाइफ सपोर्ट: गंभीर स्थिति में मरीज को पंपिंग की जरूरत थी, लेकिन एंबुलेंस में मौजूद पंपिंग मशीन ने काम करना बंद कर दिया था।
- अमानवीय स्थिति: जिस वाहन को जीवनदायिनी माना जाता है, उसकी जर्जर हालत ने मरीज के बचने की आखिरी उम्मीद भी छीन ली।
हादसे की जड़ में भी भारी लापरवाही सामने आई है। चश्मदीदों और परिजनों का आरोप है कि जिस रोपवे की ट्रॉली में केवल 4 लोगों के बैठने की जगह थी, उसमें क्षमता से ढाई गुना ज्यादा यानी 10 लोगों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर केवल पैसों के लिए लोगों की जान को जोखिम में डाला गया।
इस पूरी घटना पर जिम्मेदार अधिकारियों और स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रही है।
”क्या हमारे स्वास्थ्य मंत्री केवल फाइलों तक सीमित हैं? क्या गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं है?” — ये वे सवाल हैं जो आज हर नागरिक पूछ रहा है।
- हादसे की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच हो।
- रोपवे प्रबंधन और जर्जर एंबुलेंस के जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो।
- मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
अगर आज भी इस सिस्टम की मरम्मत नहीं की गई, तो कल फिर कोई परिवार इसी तरह अपनी खुशियां और अपनों को खोता रहेगा। यह समय खोखले बयानों का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है।
यह एक अत्यंत हृदयविदारक और विचलित करने वाली घटना है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए या व्यवस्था की जड़ें इतनी खोखली हो जाएं कि वे जीवन बचाने के बजाय मौत का कारण बनने लगें, तो समाज का आक्रोशित होना स्वाभाविक है। गोविंद स्वामी जी का निधन केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हमारी जर्जर हो चुकी आपातकालीन सेवाओं और प्रशासनिक अनदेखी का परिणाम है।