बलौदाबाजार। जिला मुख्यालय बलौदाबाजार में स्थापित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को दर्शाने वाली मूर्तियों के टूटने के मामले में नया मोड़ आया है। जिसे शुरुआत में तोड़फोड़ माना जा रहा था, वह वास्तव में निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही और घटिया सामग्री का नतीजा निकला है।
फॉरेंसिक जांच में हुआ खुलासा
नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा मूर्तियों में तोड़फोड़ की सूचना मिलने पर सिटी कोतवाली पुलिस और फॉरेंसिक अधिकारी राजीव पंकज ने मौके का मुआयना किया। सूक्ष्म जांच के बाद यह पाया गया कि मूर्तियों का निर्माण अत्यंत निम्न गुणवत्ता का है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि मूर्तियों में पहले से ही दरारें थीं, जिसके कारण वे अपने आप टूटकर गिरने लगीं। प्रथम दृष्टया यह तोड़फोड़ का मामला न होकर भ्रष्टाचार और खराब निर्माण का परिणाम नजर आ रहा है।
दोषी एजेंसी पर गिरेगी गाज
पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) को पत्र लिखकर मूर्तियों की तकनीकी जांच करने को कहा है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट मिलते ही मूर्ति बनाने वाली संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा के लिए लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
भविष्य में मूर्तियों की सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं:
सीसीटीवी कवरेज: मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखकर सभी महत्वपूर्ण प्रतिमा स्थलों पर हाई-क्वालिटी सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
कंट्रोल रूम से निगरानी: इन कैमरों का सीधा फीड बलौदाबाजार कंट्रोल रूम को दिया जाएगा, ताकि 24 घंटे सतत निगरानी की जा सके।
नियमित ऑडिट: विभाग अब स्थापित प्रतिमाओं की समय-समय पर गुणवत्ता जांच भी कराएगा।
मुख्य बिंदु: फॉरेंसिक जांच में तोड़फोड़ के प्रमाण नहीं मिले हैं। निर्माण एजेंसी की लापरवाही के कारण मूर्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिस पर अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।