छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के पलारी विकासखंड में मकानों पर नंबर प्लेट लगाने के नाम पर ₹50 प्रति परिवार की अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि यह वसूली लगातार की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, पलारी क्षेत्र में लगाए जा रहे मकान नंबर प्लेट किसी छत्तीसगढ़ आधारित संस्था द्वारा नहीं, बल्कि भारतीय जन कल्याण फाउंडेशन, बिसनुपुर आश्रम रोड, झुमरी तलैया, वार्ड क्रमांक 01, थाना तिलैया, जिला कोडरमा (झारखंड) द्वारा लगाए जा रहे हैं। इस संबंध में फाउंडेशन का पत्र दिनांक 24 दिसंबर 2025 बताया जा रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर बलौदाबाजार जिला कलेक्ट्रेट द्वारा अपर कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी ज्ञापन क्रमांक 1066 एवं 1067 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मकान नंबर प्लेट स्वैच्छिक रूप से, अर्थात केवल मकान मालिक की अनुमति से ही लगाई जा सकती है। इसके साथ ही यह भी निर्देशित किया गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की राशि की वसूली नहीं की जाएगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में अधिकतम 80 रुपये शुल्क लिया जा सकता है।
कलेक्ट्रेट से जारी यह आदेश 24/12/2025 को जनपद पंचायतों एवं नगर निकायों—बलौदाबाजार, भाटापारा, सिमगा, कसडोल, पलारी सहित अन्य निकायों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को पूर्ण जानकारी के साथ भेजा गया था।
इसके बावजूद आरोप है कि जनपद पंचायत पलारी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पन्नालाल धुर्वे ने अपने द्वारा जारी आदेश क्रमांक 3280 दिनांक 05/01/2026 में कलेक्ट्रेट के आदेश की सबसे महत्वपूर्ण शर्त “स्वैच्छिक, अर्थात मकान मालिक की अनुमति से” को पूरी तरह हटा दिया। उनके आदेश में केवल “ग्रामीण क्षेत्रों के मकानों पर स्थायी मकान नंबर लगाने” का उल्लेख किया गया, जिसे कलेक्ट्रेट के निर्देशों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
इतना ही नहीं, सीईओ द्वारा अपने आदेश में यह भी जोड़ा गया कि इससे जनगणना, मतदाता सूची, गृह संख्या, आवास प्रमाण पत्र, बीपीएल सर्वे, पारिवारिक गणना तथा नए राशन कार्ड जैसे शासकीय कार्यों में सहयोग मिलेगा, जबकि जिला कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त आवेदन में इस प्रकार का कोई उल्लेख नहीं पाया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित फाउंडेशन द्वारा राशन कार्ड और महतारी वंदन योजना से नाम कटने की धमकी देकर जबरन मकान नंबर प्लेट लगाई जा रही है, जो न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि नागरिकों पर दबाव बनाने का गंभीर मामला है।
ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव एवं ग्रामीण नागरिक लगातार इस अवैध वसूली की शिकायत करते रहे, लेकिन आरोप है कि जनपद सीईओ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
बताया जा रहा है कि जनपद पंचायत पलारी क्षेत्र में लगभग 51,000 परिवार निवासरत हैं। यदि प्रत्येक परिवार से 50 रुपये की वसूली की जाती है, तो यह राशि लगभग 25 लाख रुपये से अधिक बैठती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत नहीं होती, तो अब तक इस मामले में सख्त कार्रवाई हो चुकी होती।
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और अब निगाहें जिला प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
बहुत अच्छी जानकारी महराज जी
गुड न्यूज़ 👌👌