छुरा/ गरियाबंद:- रंगों की फुहार, ढोल-नगाड़ों की थाप और चेहरों पर खिली मुस्कान—छुरा नगर में इस वर्ष होली का उत्साह देखते ही बन रहा था। सुबह से ही गली-मोहल्लों में अबीर-गुलाल की महक फैल गई और हर ओर “होली है” की गूंज सुनाई देने लगी।
इसी उत्साह के साथ छुरा नगर में होली का पर्व पूरे हर्षोल्लास और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। होलिका दहन की रात नगर के विभिन्न स्थानों पर विधिवत पूजन-अर्चन के साथ सामूहिक रूप से होलिका दहन किया गया। नगरवासियों ने परंपरानुसार पूजा कर नगर की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
ग्रहण के कारण त्यौहार में एक दिन का विराम लग गया, लेकिन इस विराम के दिन बाजारों में विशेष रौनक देखने को मिली। नगरवासियों ने रंग, गुलाल, पिचकारी और अन्य सामग्रियों की जमकर खरीदारी की। व्यापारियों के चेहरे पर भी संतोष झलकता रहा।
अगली सुबह से ही नगर की गली-मोहल्लों में होली की धूम मच गई। लोगों ने टोली बनाकर एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएँ दीं। बच्चों ने रंगीन पिचकारियों और पानी से भरे गुब्बारों के साथ जमकर मस्ती की।
नगर के वरिष्ठजनों ने पारंपरिक रीति से पूजन-अर्चन कर समाज में शांति, सौहार्द और उन्नति की प्रार्थना की। वहीं पुलिस प्रशासन ने भी मुस्तैदी से सुरक्षा व्यवस्था संभाली। चाक-चौबंद प्रबंध के चलते कहीं भी हुड़दंग या अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी और पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
ठाकुरिया चौक के पास युवाओं ने उत्साहपूर्वक रंगोत्सव मनाया। रंग-बिरंगे गुलाल और पानी से भरे गुब्बारों के साथ एक-दूसरे को रंगते हुए सबने आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश दिया।
अंततः इस वर्ष छुरा की होली ने यह सिद्ध कर दिया कि रंगों का यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, अनुशासन और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है—जिसका दृश्य सचमुच देखते ही बन रहा था।