कहते हैं पानी ही जीवन है, लेकिन सीतापार में लगता है पानी “दर्शन” की चीज बन गया है—दिखता सड़क पर है, मिलता घर में नहीं। ब्लाक पलारी अंतर्गत ग्राम पंचायत सीतापार में नल-जल योजना का हाल कुछ ऐसा है कि नल खड़े हैं शान से, पर उनमें से पानी नहीं, सिर्फ उम्मीद टपकती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने इतनी घटिया पाइपलाइन बिछाई कि कुछ ही समय में जगह-जगह लीकेज शुरू हो गया। हालात यह हैं कि गलियों में पानी बह रहा है, लेकिन घरों की टोंटियां सूखी पड़ी हैं। “हर घर जल” का नारा अब गांव में तंज बन चुका है। वार्ड क्रमांक 10 के पंच मनोज का कहना है कि निर्माण कार्य बेहद निम्न स्तर का किया गया और इसकी शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
सबसे हैरानी की बात यह है कि कई घरों के सामने सिर्फ नल का चबूतरा बना दिया गया, लेकिन वहां तक पाइपलाइन पहुंची ही नहीं। यानी विकास का ढांचा खड़ा है, लेकिन सुविधा नदारद। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई है। कुछ परिवार तो अपनी जेब से फूटी पाइपलाइन की मरम्मत करा रहे हैं ताकि कम से कम पीने का पानी मिल सके।
गर्मी दस्तक दे रही है और जल संकट की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। अगर अभी यह हाल है, तो मई-जून में स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। सवाल यह है कि घटिया निर्माण की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या गुणवत्ता जांच महज कागजों तक सीमित थी? क्या भुगतान से पहले किसी ने जमीन पर आकर हकीकत देखी?
सीतापार के ग्रामीण अब जवाब चाहते हैं। वे मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और नई, मजबूत पाइपलाइन बिछाई जाए। वरना “हर घर जल” का नारा गांव में हमेशा एक कड़वा मजाक बनकर रह जाएगा।