डोडा में दिसंबर का राशन बंद, पूर्व गड़बड़ी की सजा क्यों भुगत रहे ग्रामीण? PDS व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

SARJU PRASAD SAHU

December 23, 2025

मुंगेली । छत्तीसगढ़ सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) गरीबों की जीवनरेखा है, लेकिन मुंगेली जिले की ग्राम पंचायत डोडा में यह व्यवस्था सवालों के घेरे में है। दिसंबर का राशन आज तक नहीं बंटा, जो प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। ग्रामीणों को पूर्व गड़बड़ी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।डोडा उचित मूल्य दुकान: नेमू साहू के खिलाफ 182 क्विंटल चावल समेत बड़ी रिकवरीग्राम पंचायत डोडा की उचित मूल्य दुकान के पूर्व संचालक नेमू साहू (पत्नी – कविता साहू) के खिलाफ शक्कर 7-8 क्विंटल, नमक 7-8 क्विंटल और चावल 182 क्विंटल की गंभीर रिकवरी दर्ज हुई थी। सवाल उठता है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी के बावजूद रिकवरी हुई या नहीं, यह स्पष्ट क्यों नहीं? अगर भरपाई हो चुकी तो प्रमाण सार्वजनिक क्यों नहीं, और नहीं हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?वर्तमान संचालक का बहाना: पूर्व गड़बड़ी से राशन रोका, गांव भूखा क्यों?पूर्व संचालक की अनियमितताओं का असर आज ग्रामवासियों पर पड़ रहा है। दिसंबर राशन नहीं बंटा। वर्तमान सोसायटी संचालक पूर्व गड़बड़ी का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। क्या एक व्यक्ति की गलती का दंड पूरे गांव को मिलना चाहिए? शासन की जिम्मेदारी नहीं कि दोषी पकड़े जाएं, न कि गरीबों का पेट कटे?ग्रामीण नाराज: 13-14 तारीख तक राशन मिलता था, अब मनमानी क्यों?ग्रामीण बताते हैं कि हर माह 13-14 तारीख तक राशन बंट जाता था, लेकिन इस बार मांगने पर संचालक ने साफ मना कर दिया। क्या दुकान संचालक को मनमानी का लाइसेंस मिल गया है? दुकान कब खोले, कब बंद रखें? अगर शासन ने तिथि तय की है, तो ग्राम पंचायत में मुनादी क्यों नहीं?खाद्य विभाग की निगरानी गायब: आंदोलन की धमकी, कलेक्टर से मांगयह सिर्फ राशन का मुद्दा नहीं, प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल है। खाद्य विभाग और जिला प्रशासन की नजर कहां है? ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से निष्पक्ष जांच, एक सप्ताह में राशन वितरण, पूर्व गड़बड़ी-रिकवरी की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। चेतावनी दी कि समाधान न हुआ तो आंदोलन होगा, जिम्मेदारी प्रशासन की।PDS व्यवस्था पर सवाल: जमीनी स्तर पर जवाबदेही कब?डोडा का यह मामला बताता है कि योजनाएं कागजों पर मजबूत हों या न हों, जमीनी जवाबदेही न हो तो गरीब ही प्रभावित होते हैं। क्या प्रशासन कार्रवाई करेगा या ग्रामीण सड़कों पर उतरेंगे?

सह संपादक

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